नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।
–आईएएनएस
एएस/
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद सोमवार को 55 साल के हो गए हैं। उन्होंने 1996 में अपने करियर की शुरुआत की थी। प्रसाद ने अपने साथी जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर 1990 के दशक के अंत में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी। जिस समय भारत अपने तेज गेंदबाजों के लिए नहीं जाना जाता था, उस समय श्रीनाथ-प्रसाद की जोड़ी ने खूब नाम कमाया।
2001 तक टीम का अहम हिस्सा रहे प्रसाद लंबे कद के थे और उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकते थे। उनकी धीमी गेंद भी काफी कारगर साबित होती थी। विदेशी परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में पांच विकेट लेने वाले प्रदर्शन किए। हालांकि, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1999 में चेन्नई की धीमी पिच पर पाकिस्तान के खिलाफ दूसरी पारी में आया, जहां उन्होंने 33 रन देकर छह विकेट लिए।
प्रसाद ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2000-01 सीजन में चोट और फॉर्म में गिरावट के कारण प्रसाद को टीम से बाहर होना पड़ा। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अंडर-19 टीम और बाद में कर्नाटक राज्य टीम का कोच बनकर अपनी सेवाएं दी। साल 2007 में उन्हें बांग्लादेश दौरे के लिए भारतीय टीम का गेंदबाजी कोच नियुक्त किया गया।
बतौर कोच, प्रसाद के काम की टीम के खिलाड़ियों ने सराहना की और उन्होंने जहीर खान और ईशांत शर्मा जैसे युवा गेंदबाजों को काफी मदद की। इसके अलावा, उन्होंने उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजी कोच के रूप में काम किया और 2010 में टीम ट्रॉफी जीतने में शामिल रही।
वेंकटेश प्रसाद के करियर का सबसे प्रसिद्ध पल 1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में आया था। यह भारत और पाकिस्तान का मैच था। प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद, पाकिस्तानी ओपनर आमिर सोहेल ने प्रसाद का खुलेआम मजाक उड़ाया, लेकिन अगली ही गेंद पर सोहेल के स्टंप उखड़ गए। यह विकेट उस मैच में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान मैच हार गया।
वेंकटेश प्रसाद का आमिर सोहेल को आउट करने के बाद का रिएक्शन, आज भी भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में सबसे आइकॉनिक पलों में एक है।
वेंकटेश प्रसाद भारतीय क्रिकेट के प्रदर्शन और टीम चयन के बारे में मुखरता से बात करने के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने सोशल मीडिया पर उस समय खराब फॉर्म में चल रहे केएल राहुल के टीम इंडिया में बार-बार चयन की तीखी आलोचना की थी।