मुंबई, 27 मार्च (आईएएनएस)। फर्टिलिटी क्लीनिक चेन इंदिरा आईवीएफ ने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) के ड्राफ्ट पेपर्स को वापस ले लिया है, जिसे गोपनीय प्री-फाइलिंग रूट के माध्यम से दायर किया गया था।
कंपनी ने अपने निर्णय के पीछे की वजह मूल्यांकन और अन्य कारकों को बताया।
इंदिरा आईवीएफ ने आईपीओ को ऐसे समय पर वापस लिया है, जब कंपनी के संस्थापक अजय मुर्डिया पर एक बायोपिक फिल्म रिलीज हुई है।
अनुपम खेर और ईशा देओल की प्रमुख भूमिकाओं वाली फिल्म “तुमको मेरी कसम” का प्रीमियर 21 मार्च को हुआ, जबकि कंपनी ने 13 फरवरी को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को अपने ड्राफ्ट दस्तावेज सौंपे थे।
फिल्म की टाइमिंग से कंपनी के इनडायरेक्ट सेल्फ-प्रमोशन को लेकर नियमाक चिंताएं पैदा हो गई थीं।
सेबी के ताजा अपडेट के मुताबिक, आईपीओ ड्राफ्ट दस्तावेजों को 19 मार्च को वापस ले लिया गया था।
रिपोर्ट में बताया गया कि सेबी ने बायोपिक के रिलीज और आईपीओ फाइलिंग को लेकर चिंताएं जाहिर की थीं। हालांकि, इंदिरा आईवीएफ ने किसी भी रेगुलेटरी भागीदारी से इनकार किया है।
एक बयान में कंपनी के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि आईपीओ वापस लेने का निर्णय पूर्णतः आंतरिक वाणिज्यिक मूल्यांकन पर आधारित था।
इसके साथ ही कंपनी के प्रवक्ता ने उन सभी रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि सेबी ने कंपनी को यह आईपीओ वापस लेने को कहा है।
इंदिरा आईवीएफ उन कई कंपनियों में से एक है, जिन्होंने आईपीओ के लिए गोपनीय प्री-फाइलिंग रूट का चयन किया है।
यह विकल्प फर्मों को आईपीओ के विवरण को निजी रखने और अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (यूडीआरएचपी) चरण तक इश्यू के आकार को 50 प्रतिशत तक समायोजित करने की अनुमति देता है।
यह कंपनियों को सेबी की अंतिम टिप्पणियां प्राप्त करने के बाद आईपीओ लॉन्च करने के लिए 18 महीने का समय देता है, जबकि पारंपरिक प्रक्रिया में 12 महीने की सीमा होती है।
इंदिरा आईवीएफ की योजना आईपीओ के जरिए 3,500 करोड़ रुपये जुटाने की थी। इस पूरे इश्यू को ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के रूप में जारी किया जाना था।
–आईएएनएस
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