deshbandhu

deshbandu_logo
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • लाइफ स्टाइल
  • अर्थजगत
  • मनोरंजन
  • खेल
  • अभिमत
  • धर्म
  • विचार
  • ई पेपर
deshbandu_logo
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • लाइफ स्टाइल
  • अर्थजगत
  • मनोरंजन
  • खेल
  • अभिमत
  • धर्म
  • विचार
  • ई पेपर
Menu
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • लाइफ स्टाइल
  • अर्थजगत
  • मनोरंजन
  • खेल
  • अभिमत
  • धर्म
  • विचार
  • ई पेपर
Facebook Twitter Youtube
  • भोपाल
  • इंदौर
  • उज्जैन
  • ग्वालियर
  • जबलपुर
  • रीवा
  • चंबल
  • नर्मदापुरम
  • शहडोल
  • सागर
  • देशबन्धु जनमत
  • पाठक प्रतिक्रियाएं
  • हमें जानें
  • विज्ञापन दरें
ADVERTISEMENT
Home ब्लॉग

एपीओई4 प्रोटीन अल्जाइमर : शोध

by
November 5, 2024
in ब्लॉग
0
एपीओई4 प्रोटीन अल्जाइमर : शोध
0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp
ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

READ ALSO

मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच लाल निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार

अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने तुर्की कंपनी सेलेबी से ग्राउंड हैंडलिंग रियायत समझौता किया खत्म

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

ADVERTISEMENT

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एपीओई4 प्रोटीन की उपस्थिति मस्तिष्क में स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं माइक्रोग्लिया पर असर डाल सकती है। इस वजह से माइक्रोग्लिया हानिकारक साबित हो सकता है।

यही माइक्रोग्लिया मस्तिष्क की रक्षा में तैनात रहते हैं और किसी भी गैर जरूरी या हानिकारक प्रोटीन को हटाने में मददगार साबित होते हैं। लेकिन एपीओई4 प्रोटीन की मौजूदगी में ये काम नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन के लिए अमेरिका में ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर का अध्ययन करने के लिए एक काइमेरिक चूहे का मॉडल बनाया। चूहे के मॉडल में न केवल मानव एपीओई जीन है, बल्कि टीम ने चूहों के दिमाग में एपीओई 4 प्रोटीन बनाने वाले मानव न्यूरॉन्स भी प्रत्यारोपित किए हैं।

जर्नल सेल स्टेम सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि ऐसी दवाएं जो न्यूरॉन्स में एपीओई4 के स्तर को कम कर सकती हैं या माइक्रोग्लिया की संख्या या उनकी सूजन संबंधी गतिविधि के स्तर को कम कर सकती हैं वो एपीओई4 जीन वाले लोगों को अल्जाइमर रोग से बचाने या उन्हें रोकने में कारगर साबित हो सकती हैं।

ग्लेडस्टोन के वरिष्ठ अन्वेषक याडोंग हुआंग ने कहा, “अल्जाइमर रोगियों में माइक्रोग्लिया को कम करने वाली दवाएं अंततः रोग के उपचार में उपयोगी हो सकती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि टीम ने मस्तिष्क के परिपक्व होने के बाद चूहों के मॉडल में न्यूरॉन्स प्रत्यारोपित किए। इसके बाद टीम ने चूहों के दिमाग से माइक्रोग्लिया हटा दिया।

शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ती उम्र वाले चूहों में एमिलॉयड और ताओ ज्यादा जमने लगा।

इसके अलावा एक दवा का उपयोग करके टीम ने काइमेरिक चूहों के मस्तिष्क से चुनिंदा रूप से माइक्रोग्लिया को हटा दिया।

इसके परिणामस्वरूप मानव एपीओई4 न्यूरॉन्स वाले चूहों में एमिलॉयड और टाउ समुच्चयों के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आई। यह गिरावट दर्शाती है कि एपीओई 4 और माइक्रोग्लिया अल्जाइमर रोग की प्रमुख विशेषताओं को संचालित करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

टीम ने यह भी पाया कि जब एपीओई 4 और एपीओई 3 युक्त मानव न्यूरॉन्स मौजूद रहते हैं, तो माइक्रोग्लिया में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर भी बढ़ जाता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

Related Posts

ब्लॉग

मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच लाल निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार

May 16, 2025
ब्लॉग

अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने तुर्की कंपनी सेलेबी से ग्राउंड हैंडलिंग रियायत समझौता किया खत्म

May 16, 2025
ब्लॉग

एप्पल के लिए चीन का बेहतर विकल्प ‘भारत’, तेजी से अपनी स्थिति कर रहा मजबूत

May 16, 2025
ब्लॉग

सोशल मीडिया पर आलोचना के बीच इंडिगो ने तुर्की एयरलाइंस से कोड शेयरिंग का किया बचाव

May 15, 2025
आईआईटी खड़गपुर का नया स्मार्ट ट्रैक्ड रोबोट फसल में रोग का पता लगाने में सक्षम
ब्लॉग

आईआईटी खड़गपुर का नया स्मार्ट ट्रैक्ड रोबोट फसल में रोग का पता लगाने में सक्षम

May 15, 2025
ब्लॉग

सारेगामा इंडिया की चौथी तिमाही में आय 50 प्रतिशत से अधिक गिरी, मुनाफे में भी आई कमी

May 15, 2025
Next Post

टेस्ट सीरीज हार के बाद अनुष्का शर्मा ने पति विराट और बच्चों के साथ शेयर की तस्‍वीर

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

बंदा प्रकाश तेलंगाना विधान परिषद के उप सभापति चुने गए

बंदा प्रकाश तेलंगाना विधान परिषद के उप सभापति चुने गए

February 12, 2023
बीएसएफ ने मेघालय में 40 मवेशियों को छुड़ाया, 3 तस्कर गिरफ्तार

बीएसएफ ने मेघालय में 40 मवेशियों को छुड़ाया, 3 तस्कर गिरफ्तार

February 12, 2023
चीनी शताब्दी की दूर-दूर तक संभावना नहीं

चीनी शताब्दी की दूर-दूर तक संभावना नहीं

February 12, 2023

बंगाल के जलपाईगुड़ी में बाढ़ जैसे हालात, शहर में घुसने लगा नदी का पानी

August 26, 2023
राधिका खेड़ा ने छोड़ा कांग्रेस का दामन, प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा

राधिका खेड़ा ने छोड़ा कांग्रेस का दामन, प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा

May 5, 2024

EDITOR'S PICK

स्पेस स्टार्टअप की संख्या पिछले दो वर्ष में 200 गुना बढ़ी

June 21, 2024
मध्‍यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों के मामले में कांग्रेस ने राज्‍य सरकार को घेरा

मध्‍यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों के मामले में कांग्रेस ने राज्‍य सरकार को घेरा

November 9, 2024
आपसे ज्यादा मुझे कौन प्यार करेगा, सामंथा प्रभु का डेटिंग पर नया ट्वीट

आपसे ज्यादा मुझे कौन प्यार करेगा, सामंथा प्रभु का डेटिंग पर नया ट्वीट

March 27, 2023

पटना में पहली बार एयर शो, स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा बाबू वीर कुंवर सिंह को सलामी

April 21, 2025
ADVERTISEMENT

Contact us

Address

Deshbandhu Complex, Naudra Bridge Jabalpur 482001

Mail

deshbandhump@gmail.com

Mobile

9425156056

Important links

  • राशि-भविष्य
  • वर्गीकृत विज्ञापन
  • लाइफ स्टाइल
  • मनोरंजन
  • ब्लॉग

Important links

  • देशबन्धु जनमत
  • पाठक प्रतिक्रियाएं
  • हमें जानें
  • विज्ञापन दरें
  • ई पेपर

Related Links

  • Mayaram Surjan
  • Swayamsiddha
  • Deshbandhu

Social Links

081558
Total views : 5875197
Powered By WPS Visitor Counter

Published by Abhas Surjan on behalf of Patrakar Prakashan Pvt.Ltd., Deshbandhu Complex, Naudra Bridge, Jabalpur – 482001 |T:+91 761 4006577 |M: +91 9425156056 Disclaimer, Privacy Policy & Other Terms & Conditions The contents of this website is for reading only. Any unauthorised attempt to temper / edit / change the contents of this website comes under cyber crime and is punishable.

Copyright @ 2022 Deshbandhu. All rights are reserved.

  • Disclaimer, Privacy Policy & Other Terms & Conditions
No Result
View All Result
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • लाइफ स्टाइल
  • अर्थजगत
  • मनोरंजन
  • खेल
  • अभिमत
  • धर्म
  • विचार
  • ई पेपर

Copyright @ 2022 Deshbandhu-MP All rights are reserved.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Notifications