मैसूर, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शनिवार को कहा कि जाति जनगणना समाज को विभाजित नहीं करेगी।
उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ”आजादी के 76 वर्षों के बाद जाति की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्थिति का पता लगाने की जरूरत है। हमारा समाज जाति आधारित समाज है।
आंकड़े उन जातियों को मुख्यधारा में लाने के लिए महत्वपूर्ण हैं जो राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से बराबरी के नहीं हैं। इस उद्देश्य के लिए जाति जनगणना की आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण होना चाहिए, जिससे समाज बंटे नहीं।
उन्होंने कहा कि जब कंथाराजू पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष थे तो तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने जाति रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया था।
”अब, आयोग का नेतृत्व कोई अन्य व्यक्ति कर रहा है। मैंने उससे मूल जनगणना रिपोर्ट जमा करने को कहा है। उन्होंने मुझसे कहा है कि वह नवंबर में रिपोर्ट सौंप देंगे।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते रहते हैं ‘सबका साथ, सबका विकास’ लेकिन वह मुसलमानों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं देते।
उन्होंने कहा, ”बयान देने में अंतर होता है जबकि जमीनी हकीकत अलग होती है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गारंटी योजना उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय कमी है।
उन्होंने कहा, ”अब, आयोग का नेतृत्व कोई अन्य व्यक्ति कर रहा है और मैंने उससे मूल जनगणना रिपोर्ट जमा करने को कहा है। उन्होंने मुझसे कहा है कि वह नवंबर में रिपोर्ट सौंप देंगे।”
उन्होंने कहा कि सूखे का आकलन करने के लिए तीन केंद्रीय टीमें राज्य के 11 जिलों का दौरा कर रही हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार मुआवजा देगी। केंद्र सरकार द्वारा मीडिया घरानों पर देशद्रोह का मामला दर्ज करना सही उपाय नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस सरकार द्वारा लिंगायत समुदाय के अधिकारियों को निशाना बनाए जाने के सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। इस संबंध में जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शमनुरू शिवशंकरप्पा के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह एक वरिष्ठ नेता हैं और वह उनसे बात करेंगे।
–आईएएनएस
पीके/एबीएम
मैसूर, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शनिवार को कहा कि जाति जनगणना समाज को विभाजित नहीं करेगी।
उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ”आजादी के 76 वर्षों के बाद जाति की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्थिति का पता लगाने की जरूरत है। हमारा समाज जाति आधारित समाज है।
आंकड़े उन जातियों को मुख्यधारा में लाने के लिए महत्वपूर्ण हैं जो राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से बराबरी के नहीं हैं। इस उद्देश्य के लिए जाति जनगणना की आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण होना चाहिए, जिससे समाज बंटे नहीं।
उन्होंने कहा कि जब कंथाराजू पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष थे तो तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने जाति रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया था।
”अब, आयोग का नेतृत्व कोई अन्य व्यक्ति कर रहा है। मैंने उससे मूल जनगणना रिपोर्ट जमा करने को कहा है। उन्होंने मुझसे कहा है कि वह नवंबर में रिपोर्ट सौंप देंगे।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते रहते हैं ‘सबका साथ, सबका विकास’ लेकिन वह मुसलमानों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं देते।
उन्होंने कहा, ”बयान देने में अंतर होता है जबकि जमीनी हकीकत अलग होती है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गारंटी योजना उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय कमी है।
उन्होंने कहा, ”अब, आयोग का नेतृत्व कोई अन्य व्यक्ति कर रहा है और मैंने उससे मूल जनगणना रिपोर्ट जमा करने को कहा है। उन्होंने मुझसे कहा है कि वह नवंबर में रिपोर्ट सौंप देंगे।”
उन्होंने कहा कि सूखे का आकलन करने के लिए तीन केंद्रीय टीमें राज्य के 11 जिलों का दौरा कर रही हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार मुआवजा देगी। केंद्र सरकार द्वारा मीडिया घरानों पर देशद्रोह का मामला दर्ज करना सही उपाय नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस सरकार द्वारा लिंगायत समुदाय के अधिकारियों को निशाना बनाए जाने के सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। इस संबंध में जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शमनुरू शिवशंकरप्पा के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह एक वरिष्ठ नेता हैं और वह उनसे बात करेंगे।
–आईएएनएस
पीके/एबीएम