चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
एसजीके/एएनएम
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
एसजीके/एएनएम
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
एसजीके/एएनएम
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
एसजीके/एएनएम
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
एसजीके/एएनएम
चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
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–आईएएनएस
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
एसजीके/एएनएम
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
एसजीके/एएनएम
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
एसजीके/एएनएम
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।
–आईएएनएस
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चेन्नई, 7 दिसंबर (आईएएनएस)। 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें 11 विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हो गए।
जिन लोगों ने विस्फोटों की योजना बनाई थी, उनके निशाने पर तत्कालीन उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी थे। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए, क्योंकि उनकी उड़ान कोयम्बटूर थोड़ी देरी से पहुंची थी।
8 अगस्त, 1993 को तमिलनाडु में आरएसएस मुख्यालय में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिसमें 11 लोग मारे गए और सात घायल हो गए। मरने वाले 11 लोगों में आठ युवा आरएसएस प्रचारक (आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता) थे, जबकि अन्य तीन स्वयंसेवक थे जो आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे।
आरएसएस मुख्यालय में हुए इस विस्फोट की योजना अल-उम्मा और उसके नेता एस.ए. बाशा ने बनाई थी, जो एक खूंखार इस्लामिक आतंकवादी बन गया था।
ये दो घटनाएं 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामवादियों द्वारा किए गए दो बड़े जवाबी हमले थे। तमिलनाडु में इस्लामी उग्रवाद में उछाल की जड़ें बाबरी मस्जिद के विध्वंस में हैं।
थिंक टैंक सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक डॉ. जी. पद्मनाभन ने आईएएनएस को बताया, 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को इस्लाम के स्वयंभू रक्षकों ने हिंदुओं के खिलाफ और विशेष रूप से आरएसएस और भाजपा और हिंदुत्व आंदोलनों के खिलाफ नफरत का एक इको सिस्टम बनाया।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र बन गया और 8 अगस्त, 1993 के दो बड़े बम विस्फोटों के बाद भी, जिसमें आरएसएस कार्यालय पर बमबारी की गई और 14 फरवरी, 1998 को, जिसमें 56 लोग मारे गए, इस्लामिक आतंकवादी राज्यभर में नफरत की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस और भाजपा के कई पदाधिकारी मारे गए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगने के बाद भी तमिलनाडु में कई जगहों पर आरएसएस/भाजपा पदाधिकारियों के घरों पर पेट्रोल बम हमले हुए।
एस.ए. बाशा और उनके अल-उम्मा सहयोगी 14 फरवरी, 1998 को बम विस्फोट से संबंधित मामले में कोयम्बटूर केंद्रीय जेल में हैंै। बाशा का भतीजा, मोहम्मद तालका, अब कोयम्बटूर कार विस्फोट मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत कोयंबटूर जेल में बंद है, जिसमें एक 29 वर्षीय युवक जमीशा मुबीन की मौत हो गई थी। जांच करने पर पुलिस और एनआईए ने पाया कि विस्फोट आकस्मिक नहीं था और यह एक सुनियोजित हमला था, लेकिन हत्यारे की अनुभवहीनता के कारण कार विस्फोट ऐसी जगह पर हुआ, जहां कोई लोग नहीं थे।
कार बम विस्फोट 23 अक्टूबर, 2022 को संगमेश्वर मंदिर, उक्कड़म, कोयम्बटूर के पास हुआ था और यह दीपावली की पूर्व संध्या थी।
पुलिस के अनुसार, हत्यारा बाजार के पास लोन वुल्फ हमला करने की योजना बना रहा था, जहां दीपावली समारोह के लिए अंतिम समय में खरीदारी करने के लिए हजारों लोग आते हैं।
6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तमिलनाडु में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आरएसएस/भाजपा के खिलाफ हमले शुरू करने और सामान्य रूप से हिंदुओं के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए मुसलमानों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश की।
कन्याकुमारी के एक मौलवी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, बाबरी मस्जिद विध्वंस समुदाय के लिए एक बड़ा सदमा था, लेकिन दुख की बात है कि इसे कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नफरत फैलाने में बदल दिया गया।
उन्होंने कहा, भले ही यह एक छोटा अल्पसंख्यक समूह था, जो बदला लेना चाहता था, मगर यह सच नहीं है और अस्वीकार्य है कि पूरे इस्लामी समाज को हिंसक अपराधियों में बदल दिया गया था। हालांकि, इस छोटे से अल्पसंख्यक समूह की आवाज का कुछ युवाओं के बीच प्रभाव था। बड़े बम विस्फोटों में कई निर्दोष लोग मारे गए, जो इस्लाम और इसकी शिक्षाओं को कभी भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक विद्वानों और मौलवियों ने इन युवाओं के इस तरह के रवैये को दूर करने की पूरी कोशिश की है।