अगरतला, 24 जुलाई (आईएएनएस)। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) ने कहा कि सोमवार को त्रिपुरा के खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.8 मापी गई।
एनसीएस ने कहा कि खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप सतह से 31 किमी की गहराई पर आया था। किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है।
पर्वतीय पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम, मिजोरम और मणिपुर में लगातार आए भूकंपों ने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है, जिससे उन्हें भूकंप-सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
भूकंप विज्ञानी पूर्वोत्तर क्षेत्र को दुनिया का छठा सबसे अधिक भूकंप-प्रोन क्षेत्र मानते हैं।
–आईएएनएस
एफजेड/एबीएम
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अगरतला, 24 जुलाई (आईएएनएस)। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) ने कहा कि सोमवार को त्रिपुरा के खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.8 मापी गई।
एनसीएस ने कहा कि खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप सतह से 31 किमी की गहराई पर आया था। किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है।
पर्वतीय पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम, मिजोरम और मणिपुर में लगातार आए भूकंपों ने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है, जिससे उन्हें भूकंप-सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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एनसीएस ने कहा कि खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप सतह से 31 किमी की गहराई पर आया था। किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है।
पर्वतीय पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम, मिजोरम और मणिपुर में लगातार आए भूकंपों ने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है, जिससे उन्हें भूकंप-सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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एनसीएस ने कहा कि खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप सतह से 31 किमी की गहराई पर आया था। किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है।
पर्वतीय पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम, मिजोरम और मणिपुर में लगातार आए भूकंपों ने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है, जिससे उन्हें भूकंप-सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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एनसीएस ने कहा कि खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप सतह से 31 किमी की गहराई पर आया था। किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है।
पर्वतीय पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम, मिजोरम और मणिपुर में लगातार आए भूकंपों ने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है, जिससे उन्हें भूकंप-सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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एनसीएस ने कहा कि खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप सतह से 31 किमी की गहराई पर आया था। किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है।
पर्वतीय पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम, मिजोरम और मणिपुर में लगातार आए भूकंपों ने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है, जिससे उन्हें भूकंप-सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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एनसीएस ने कहा कि खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप सतह से 31 किमी की गहराई पर आया था। किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है।
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एनसीएस ने कहा कि खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप सतह से 31 किमी की गहराई पर आया था। किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है।
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एनसीएस ने कहा कि खोवाई जिले और बांग्लादेश के आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप सतह से 31 किमी की गहराई पर आया था। किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं है।
पर्वतीय पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम, मिजोरम और मणिपुर में लगातार आए भूकंपों ने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है, जिससे उन्हें भूकंप-सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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पर्वतीय पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम, मिजोरम और मणिपुर में लगातार आए भूकंपों ने अधिकारियों को चिंतित कर दिया है, जिससे उन्हें भूकंप-सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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