चंडीगढ़, 3 जनवरी (आईएएनएस)। पंजाब सरकार ने जल संरक्षण और प्रबंधन प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को एक निजी कंपनी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
मृदा एवं जल संरक्षण विभाग और होशियारपुर स्थित पेपर कंपनी कुआंटम पेपर्स लिमिटेड के बीच पंजाब में अपनी तरह का पहला समझौता हुआ।
यह समझौता चंडीगढ़ में मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा की मौजूदगी में हुआ। मंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र की इकाई के साथ यह साझेदारी राज्य में अपनी तरह की पहली साझेदारी है।
मंत्री ने कहा कि यह पहल पहली बार राज्य के जल संरक्षण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाएगी। यह सरकार के जल संरक्षण कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगा और भविष्य में सार्वजनिक-निजी सहयोग के लिए आधार तैयार करेगा।
उन्होंने बताया कि एमओयू के तहत कंपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड या विशेष रूप से आवंटित फंड के माध्यम से जल संसाधन संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित नई तथा चल रही दोनों परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण प्रदान करेगी।
चेक बांधों के निर्माण, कुशल सिंचाई प्रणालियों के लागू, उपचारित पानी के उपयोग आदि के लिए धन निर्धारित किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य एक अनिश्चित भूजल स्थिति का सामना कर रहा है। जिसका लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक दोहन की श्रेणी में है और यदि उपचारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो वह दिन दूर नहीं जब यह बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन खत्म हो जाएगा।
–आईएएनएस
एफजेड/एबीएम
चंडीगढ़, 3 जनवरी (आईएएनएस)। पंजाब सरकार ने जल संरक्षण और प्रबंधन प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को एक निजी कंपनी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
मृदा एवं जल संरक्षण विभाग और होशियारपुर स्थित पेपर कंपनी कुआंटम पेपर्स लिमिटेड के बीच पंजाब में अपनी तरह का पहला समझौता हुआ।
यह समझौता चंडीगढ़ में मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा की मौजूदगी में हुआ। मंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र की इकाई के साथ यह साझेदारी राज्य में अपनी तरह की पहली साझेदारी है।
मंत्री ने कहा कि यह पहल पहली बार राज्य के जल संरक्षण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाएगी। यह सरकार के जल संरक्षण कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगा और भविष्य में सार्वजनिक-निजी सहयोग के लिए आधार तैयार करेगा।
उन्होंने बताया कि एमओयू के तहत कंपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड या विशेष रूप से आवंटित फंड के माध्यम से जल संसाधन संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित नई तथा चल रही दोनों परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण प्रदान करेगी।
चेक बांधों के निर्माण, कुशल सिंचाई प्रणालियों के लागू, उपचारित पानी के उपयोग आदि के लिए धन निर्धारित किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य एक अनिश्चित भूजल स्थिति का सामना कर रहा है। जिसका लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक दोहन की श्रेणी में है और यदि उपचारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो वह दिन दूर नहीं जब यह बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन खत्म हो जाएगा।
–आईएएनएस
एफजेड/एबीएम