गुवाहाटी, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश में सोमवार को भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से असम के धेमाजी जिले में लोअर सुबनसिरी पनबिजली परियोजना में निमार्णाधीन बांध के मुख्य हिस्से को नुकसान पहुंचा है।
भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इस बीच बांध निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने एक बार फिर नाराजगी जताई है। इस घटना से उनमें दहशत का माहौल है।
नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) असम-अरुणाचल सीमा के साथ धेमाजी जिले के गेरुकामुख में लोअर सुबनसिरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है।
निर्माण शुरू होने से पहले ही यह परियोजना विवादों में घिर गई थी, क्योंकि पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी थी कि बांध के नीचे की ओर रहने वाले लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कई संगठन इस परियोजना का विरोध करते हुए दावा कर रहे हैं कि असम के तीन जिलों धेमाजी, बिश्वनाथ और लखीमपुर में नीचे की ओर रहने वाले लोगों को निर्माण पूरा होने के बाद व्यापक प्रभाव का सामना करना पड़ेगा।
–आईएएनएस
एफजेड/एएनएम
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गुवाहाटी, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश में सोमवार को भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से असम के धेमाजी जिले में लोअर सुबनसिरी पनबिजली परियोजना में निमार्णाधीन बांध के मुख्य हिस्से को नुकसान पहुंचा है।
भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इस बीच बांध निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने एक बार फिर नाराजगी जताई है। इस घटना से उनमें दहशत का माहौल है।
नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) असम-अरुणाचल सीमा के साथ धेमाजी जिले के गेरुकामुख में लोअर सुबनसिरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है।
निर्माण शुरू होने से पहले ही यह परियोजना विवादों में घिर गई थी, क्योंकि पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी थी कि बांध के नीचे की ओर रहने वाले लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कई संगठन इस परियोजना का विरोध करते हुए दावा कर रहे हैं कि असम के तीन जिलों धेमाजी, बिश्वनाथ और लखीमपुर में नीचे की ओर रहने वाले लोगों को निर्माण पूरा होने के बाद व्यापक प्रभाव का सामना करना पड़ेगा।
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भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इस बीच बांध निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने एक बार फिर नाराजगी जताई है। इस घटना से उनमें दहशत का माहौल है।
नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) असम-अरुणाचल सीमा के साथ धेमाजी जिले के गेरुकामुख में लोअर सुबनसिरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है।
निर्माण शुरू होने से पहले ही यह परियोजना विवादों में घिर गई थी, क्योंकि पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी थी कि बांध के नीचे की ओर रहने वाले लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कई संगठन इस परियोजना का विरोध करते हुए दावा कर रहे हैं कि असम के तीन जिलों धेमाजी, बिश्वनाथ और लखीमपुर में नीचे की ओर रहने वाले लोगों को निर्माण पूरा होने के बाद व्यापक प्रभाव का सामना करना पड़ेगा।
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भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इस बीच बांध निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने एक बार फिर नाराजगी जताई है। इस घटना से उनमें दहशत का माहौल है।
नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) असम-अरुणाचल सीमा के साथ धेमाजी जिले के गेरुकामुख में लोअर सुबनसिरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है।
निर्माण शुरू होने से पहले ही यह परियोजना विवादों में घिर गई थी, क्योंकि पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी थी कि बांध के नीचे की ओर रहने वाले लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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निर्माण शुरू होने से पहले ही यह परियोजना विवादों में घिर गई थी, क्योंकि पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी थी कि बांध के नीचे की ओर रहने वाले लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) असम-अरुणाचल सीमा के साथ धेमाजी जिले के गेरुकामुख में लोअर सुबनसिरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है।
निर्माण शुरू होने से पहले ही यह परियोजना विवादों में घिर गई थी, क्योंकि पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी थी कि बांध के नीचे की ओर रहने वाले लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कई संगठन इस परियोजना का विरोध करते हुए दावा कर रहे हैं कि असम के तीन जिलों धेमाजी, बिश्वनाथ और लखीमपुर में नीचे की ओर रहने वाले लोगों को निर्माण पूरा होने के बाद व्यापक प्रभाव का सामना करना पड़ेगा।
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भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इस बीच बांध निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने एक बार फिर नाराजगी जताई है। इस घटना से उनमें दहशत का माहौल है।
नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) असम-अरुणाचल सीमा के साथ धेमाजी जिले के गेरुकामुख में लोअर सुबनसिरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है।
निर्माण शुरू होने से पहले ही यह परियोजना विवादों में घिर गई थी, क्योंकि पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी थी कि बांध के नीचे की ओर रहने वाले लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कई संगठन इस परियोजना का विरोध करते हुए दावा कर रहे हैं कि असम के तीन जिलों धेमाजी, बिश्वनाथ और लखीमपुर में नीचे की ओर रहने वाले लोगों को निर्माण पूरा होने के बाद व्यापक प्रभाव का सामना करना पड़ेगा।
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भारी भूस्खलन के कारण पनबिजली परियोजना पर मिट्टी और बड़े-बड़े बोल्डर गिर गए और मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना पड़ा। पुलिस के मुताबिक, निर्माण स्थल से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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