इस्लामाबाद, 11 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के हिंसा प्रभावित पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में यदि अशांति और बढ़ती है तो आपातकाल लगाया जा सकता है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह बात कही गई है।
द न्यूज की खबर के अनुसार, अगर आंतरिक गड़बड़ी प्रांतीय सरकार की शक्ति से परे है तो पाकिस्तान के संविधान में ऐसी स्थिति के प्रावधान है।
संविधान के अनुच्छेद 232 में आपातकाल की उद्घोषणा का प्रावधान है।
इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य होता है।
हालांकि, प्रांतीय सरकार की नियंत्रित करने की शक्तियों से परे आंतरिक गड़बड़ी के कारण आपातकाल लगाने के लिए प्रांतीय विधानसभा से एक प्रस्ताव की आवश्यकता होगी।
लेकिन मौजूदा स्थिति में, दोनों प्रांतों की विधानसभाएं इस साल की शुरुआत में ही भंग कर दी गई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी कि विरोध में दोनों प्रांतों में पीटीआई के प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की है तथा सरकारी संस्थानों पर हमले किए हैं।
संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
आपातकाल के समय संघीय विधान सूची में शामिल नहीं किए गए किसी भी मामले के संबंध में संसद के पास प्रांत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति होगी।
–आईएएनएस
एकेजे
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इस्लामाबाद, 11 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के हिंसा प्रभावित पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में यदि अशांति और बढ़ती है तो आपातकाल लगाया जा सकता है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह बात कही गई है।
द न्यूज की खबर के अनुसार, अगर आंतरिक गड़बड़ी प्रांतीय सरकार की शक्ति से परे है तो पाकिस्तान के संविधान में ऐसी स्थिति के प्रावधान है।
संविधान के अनुच्छेद 232 में आपातकाल की उद्घोषणा का प्रावधान है।
इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य होता है।
हालांकि, प्रांतीय सरकार की नियंत्रित करने की शक्तियों से परे आंतरिक गड़बड़ी के कारण आपातकाल लगाने के लिए प्रांतीय विधानसभा से एक प्रस्ताव की आवश्यकता होगी।
लेकिन मौजूदा स्थिति में, दोनों प्रांतों की विधानसभाएं इस साल की शुरुआत में ही भंग कर दी गई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी कि विरोध में दोनों प्रांतों में पीटीआई के प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की है तथा सरकारी संस्थानों पर हमले किए हैं।
संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
आपातकाल के समय संघीय विधान सूची में शामिल नहीं किए गए किसी भी मामले के संबंध में संसद के पास प्रांत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति होगी।
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इस्लामाबाद, 11 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के हिंसा प्रभावित पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में यदि अशांति और बढ़ती है तो आपातकाल लगाया जा सकता है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह बात कही गई है।
द न्यूज की खबर के अनुसार, अगर आंतरिक गड़बड़ी प्रांतीय सरकार की शक्ति से परे है तो पाकिस्तान के संविधान में ऐसी स्थिति के प्रावधान है।
संविधान के अनुच्छेद 232 में आपातकाल की उद्घोषणा का प्रावधान है।
इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य होता है।
हालांकि, प्रांतीय सरकार की नियंत्रित करने की शक्तियों से परे आंतरिक गड़बड़ी के कारण आपातकाल लगाने के लिए प्रांतीय विधानसभा से एक प्रस्ताव की आवश्यकता होगी।
लेकिन मौजूदा स्थिति में, दोनों प्रांतों की विधानसभाएं इस साल की शुरुआत में ही भंग कर दी गई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी कि विरोध में दोनों प्रांतों में पीटीआई के प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की है तथा सरकारी संस्थानों पर हमले किए हैं।
संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
आपातकाल के समय संघीय विधान सूची में शामिल नहीं किए गए किसी भी मामले के संबंध में संसद के पास प्रांत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति होगी।
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द न्यूज की खबर के अनुसार, अगर आंतरिक गड़बड़ी प्रांतीय सरकार की शक्ति से परे है तो पाकिस्तान के संविधान में ऐसी स्थिति के प्रावधान है।
संविधान के अनुच्छेद 232 में आपातकाल की उद्घोषणा का प्रावधान है।
इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य होता है।
हालांकि, प्रांतीय सरकार की नियंत्रित करने की शक्तियों से परे आंतरिक गड़बड़ी के कारण आपातकाल लगाने के लिए प्रांतीय विधानसभा से एक प्रस्ताव की आवश्यकता होगी।
लेकिन मौजूदा स्थिति में, दोनों प्रांतों की विधानसभाएं इस साल की शुरुआत में ही भंग कर दी गई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी कि विरोध में दोनों प्रांतों में पीटीआई के प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की है तथा सरकारी संस्थानों पर हमले किए हैं।
संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
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संविधान के अनुच्छेद 232 में आपातकाल की उद्घोषणा का प्रावधान है।
इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
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द न्यूज की खबर के अनुसार, अगर आंतरिक गड़बड़ी प्रांतीय सरकार की शक्ति से परे है तो पाकिस्तान के संविधान में ऐसी स्थिति के प्रावधान है।
संविधान के अनुच्छेद 232 में आपातकाल की उद्घोषणा का प्रावधान है।
इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
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हालांकि, प्रांतीय सरकार की नियंत्रित करने की शक्तियों से परे आंतरिक गड़बड़ी के कारण आपातकाल लगाने के लिए प्रांतीय विधानसभा से एक प्रस्ताव की आवश्यकता होगी।
लेकिन मौजूदा स्थिति में, दोनों प्रांतों की विधानसभाएं इस साल की शुरुआत में ही भंग कर दी गई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी कि विरोध में दोनों प्रांतों में पीटीआई के प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की है तथा सरकारी संस्थानों पर हमले किए हैं।
संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
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द न्यूज की खबर के अनुसार, अगर आंतरिक गड़बड़ी प्रांतीय सरकार की शक्ति से परे है तो पाकिस्तान के संविधान में ऐसी स्थिति के प्रावधान है।
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संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
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इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
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संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
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द न्यूज की खबर के अनुसार, अगर आंतरिक गड़बड़ी प्रांतीय सरकार की शक्ति से परे है तो पाकिस्तान के संविधान में ऐसी स्थिति के प्रावधान है।
संविधान के अनुच्छेद 232 में आपातकाल की उद्घोषणा का प्रावधान है।
इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य होता है।
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लेकिन मौजूदा स्थिति में, दोनों प्रांतों की विधानसभाएं इस साल की शुरुआत में ही भंग कर दी गई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी कि विरोध में दोनों प्रांतों में पीटीआई के प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की है तथा सरकारी संस्थानों पर हमले किए हैं।
संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
आपातकाल के समय संघीय विधान सूची में शामिल नहीं किए गए किसी भी मामले के संबंध में संसद के पास प्रांत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति होगी।
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इस्लामाबाद, 11 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के हिंसा प्रभावित पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में यदि अशांति और बढ़ती है तो आपातकाल लगाया जा सकता है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह बात कही गई है।
द न्यूज की खबर के अनुसार, अगर आंतरिक गड़बड़ी प्रांतीय सरकार की शक्ति से परे है तो पाकिस्तान के संविधान में ऐसी स्थिति के प्रावधान है।
संविधान के अनुच्छेद 232 में आपातकाल की उद्घोषणा का प्रावधान है।
इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य होता है।
हालांकि, प्रांतीय सरकार की नियंत्रित करने की शक्तियों से परे आंतरिक गड़बड़ी के कारण आपातकाल लगाने के लिए प्रांतीय विधानसभा से एक प्रस्ताव की आवश्यकता होगी।
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संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
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संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
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इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
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लेकिन मौजूदा स्थिति में, दोनों प्रांतों की विधानसभाएं इस साल की शुरुआत में ही भंग कर दी गई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी कि विरोध में दोनों प्रांतों में पीटीआई के प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की है तथा सरकारी संस्थानों पर हमले किए हैं।
संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
आपातकाल के समय संघीय विधान सूची में शामिल नहीं किए गए किसी भी मामले के संबंध में संसद के पास प्रांत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति होगी।
–आईएएनएस
एकेजे
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इस्लामाबाद, 11 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के हिंसा प्रभावित पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में यदि अशांति और बढ़ती है तो आपातकाल लगाया जा सकता है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह बात कही गई है।
द न्यूज की खबर के अनुसार, अगर आंतरिक गड़बड़ी प्रांतीय सरकार की शक्ति से परे है तो पाकिस्तान के संविधान में ऐसी स्थिति के प्रावधान है।
संविधान के अनुच्छेद 232 में आपातकाल की उद्घोषणा का प्रावधान है।
इसके अनुसार, यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि एक गंभीर आपादा की स्थिति है जिसके कारण पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा पर युद्ध या बाहरी आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है, या प्रांतीय सरकार के नियंत्रण से परे आंतरिक गड़बड़ी है तो वह आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य होता है।
हालांकि, प्रांतीय सरकार की नियंत्रित करने की शक्तियों से परे आंतरिक गड़बड़ी के कारण आपातकाल लगाने के लिए प्रांतीय विधानसभा से एक प्रस्ताव की आवश्यकता होगी।
लेकिन मौजूदा स्थिति में, दोनों प्रांतों की विधानसभाएं इस साल की शुरुआत में ही भंग कर दी गई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी कि विरोध में दोनों प्रांतों में पीटीआई के प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की है तथा सरकारी संस्थानों पर हमले किए हैं।
संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपने दम पर आपातकाल की उद्घोषणा करता है, तो 10 दिन के भीतर प्रत्येक सदन द्वारा अनुमोदन के लिए दोनों संसदों के समक्ष रखा जाएगा।
आपातकाल के समय संघीय विधान सूची में शामिल नहीं किए गए किसी भी मामले के संबंध में संसद के पास प्रांत या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति होगी।