नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ई-संजीवनी को आम आदमी के लिए जीवनरक्षक ऐप बताया।
अपने मासिक रेडियो प्रसारण मन की बात में मोदी ने कहा, ई-संजीवनी देश के आम आदमी के लिए, मध्यम वर्ग के लिए, पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जीवन रक्षक ऐप बन रहा है। यह भारत की डिजिटल क्रांति की ताकत है और आज हम हर क्षेत्र में इसका असर देख रहे हैं। आप भी जानिए भारत की यूपीआई की ताकत। दुनिया के कई देश इसकी ओर खिंचे चले आ रहे हैं।
पिछले हफ्ते भारत के यूपीआई और सिंगापुर के पे नाउ के बीच हुए यूपीआई-पे नाउ लिंक के लॉन्च का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, अब सिंगापुर और भारत के लोग अपने मोबाइल फोन से उसी तरह पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं जैसे वे अपने देशों में करते हैं। मुझे खुशी है कि लोगों ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत का ई-संजीवनी ऐप हो या यूपीआई, ये ईज ऑफ लिविंग को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, ऐसा ही एक ऐप है ई-संजीवनी। इस ऐप के जरिए टेली-कंसल्टेशन यानी दूर बैठकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आप डॉक्टर से अपनी बीमारी के बारे में सलाह ले सकते हैं। अभी तक इस ऐप का इस्तेमाल करने वाले टेली कंसल्टेंट्स की संख्या 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। आप कल्पना कर सकते हैं! वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 10 करोड़ परामर्श, मरीज और डॉक्टर के बीच एक मजबूत बॉन्ड, यह एक बड़ी उपलब्धि है।
–आईएएनएस
पीके/एसकेपी
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नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ई-संजीवनी को आम आदमी के लिए जीवनरक्षक ऐप बताया।
अपने मासिक रेडियो प्रसारण मन की बात में मोदी ने कहा, ई-संजीवनी देश के आम आदमी के लिए, मध्यम वर्ग के लिए, पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जीवन रक्षक ऐप बन रहा है। यह भारत की डिजिटल क्रांति की ताकत है और आज हम हर क्षेत्र में इसका असर देख रहे हैं। आप भी जानिए भारत की यूपीआई की ताकत। दुनिया के कई देश इसकी ओर खिंचे चले आ रहे हैं।
पिछले हफ्ते भारत के यूपीआई और सिंगापुर के पे नाउ के बीच हुए यूपीआई-पे नाउ लिंक के लॉन्च का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, अब सिंगापुर और भारत के लोग अपने मोबाइल फोन से उसी तरह पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं जैसे वे अपने देशों में करते हैं। मुझे खुशी है कि लोगों ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत का ई-संजीवनी ऐप हो या यूपीआई, ये ईज ऑफ लिविंग को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, ऐसा ही एक ऐप है ई-संजीवनी। इस ऐप के जरिए टेली-कंसल्टेशन यानी दूर बैठकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आप डॉक्टर से अपनी बीमारी के बारे में सलाह ले सकते हैं। अभी तक इस ऐप का इस्तेमाल करने वाले टेली कंसल्टेंट्स की संख्या 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। आप कल्पना कर सकते हैं! वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 10 करोड़ परामर्श, मरीज और डॉक्टर के बीच एक मजबूत बॉन्ड, यह एक बड़ी उपलब्धि है।
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नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ई-संजीवनी को आम आदमी के लिए जीवनरक्षक ऐप बताया।
अपने मासिक रेडियो प्रसारण मन की बात में मोदी ने कहा, ई-संजीवनी देश के आम आदमी के लिए, मध्यम वर्ग के लिए, पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जीवन रक्षक ऐप बन रहा है। यह भारत की डिजिटल क्रांति की ताकत है और आज हम हर क्षेत्र में इसका असर देख रहे हैं। आप भी जानिए भारत की यूपीआई की ताकत। दुनिया के कई देश इसकी ओर खिंचे चले आ रहे हैं।
पिछले हफ्ते भारत के यूपीआई और सिंगापुर के पे नाउ के बीच हुए यूपीआई-पे नाउ लिंक के लॉन्च का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, अब सिंगापुर और भारत के लोग अपने मोबाइल फोन से उसी तरह पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं जैसे वे अपने देशों में करते हैं। मुझे खुशी है कि लोगों ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत का ई-संजीवनी ऐप हो या यूपीआई, ये ईज ऑफ लिविंग को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, ऐसा ही एक ऐप है ई-संजीवनी। इस ऐप के जरिए टेली-कंसल्टेशन यानी दूर बैठकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आप डॉक्टर से अपनी बीमारी के बारे में सलाह ले सकते हैं। अभी तक इस ऐप का इस्तेमाल करने वाले टेली कंसल्टेंट्स की संख्या 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। आप कल्पना कर सकते हैं! वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 10 करोड़ परामर्श, मरीज और डॉक्टर के बीच एक मजबूत बॉन्ड, यह एक बड़ी उपलब्धि है।
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अपने मासिक रेडियो प्रसारण मन की बात में मोदी ने कहा, ई-संजीवनी देश के आम आदमी के लिए, मध्यम वर्ग के लिए, पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जीवन रक्षक ऐप बन रहा है। यह भारत की डिजिटल क्रांति की ताकत है और आज हम हर क्षेत्र में इसका असर देख रहे हैं। आप भी जानिए भारत की यूपीआई की ताकत। दुनिया के कई देश इसकी ओर खिंचे चले आ रहे हैं।
पिछले हफ्ते भारत के यूपीआई और सिंगापुर के पे नाउ के बीच हुए यूपीआई-पे नाउ लिंक के लॉन्च का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, अब सिंगापुर और भारत के लोग अपने मोबाइल फोन से उसी तरह पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं जैसे वे अपने देशों में करते हैं। मुझे खुशी है कि लोगों ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत का ई-संजीवनी ऐप हो या यूपीआई, ये ईज ऑफ लिविंग को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, ऐसा ही एक ऐप है ई-संजीवनी। इस ऐप के जरिए टेली-कंसल्टेशन यानी दूर बैठकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आप डॉक्टर से अपनी बीमारी के बारे में सलाह ले सकते हैं। अभी तक इस ऐप का इस्तेमाल करने वाले टेली कंसल्टेंट्स की संख्या 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। आप कल्पना कर सकते हैं! वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 10 करोड़ परामर्श, मरीज और डॉक्टर के बीच एक मजबूत बॉन्ड, यह एक बड़ी उपलब्धि है।
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प्रधानमंत्री ने कहा, ऐसा ही एक ऐप है ई-संजीवनी। इस ऐप के जरिए टेली-कंसल्टेशन यानी दूर बैठकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आप डॉक्टर से अपनी बीमारी के बारे में सलाह ले सकते हैं। अभी तक इस ऐप का इस्तेमाल करने वाले टेली कंसल्टेंट्स की संख्या 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। आप कल्पना कर सकते हैं! वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए 10 करोड़ परामर्श, मरीज और डॉक्टर के बीच एक मजबूत बॉन्ड, यह एक बड़ी उपलब्धि है।
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