पटना, 1 मई (आईएएनएस)। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के नेता और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए विवादित बयान पर सफाई पेश की। उन्होंने अपने बयान पर खेद जताते हुए कहा कि बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।
पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए कि उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी को लेकर मैंने कोई विवादास्पद बयान नहीं दिया था, फिर भी अगर किसी को उस बयान से दुख पहुंचा हो, तो मैं इसके लिए खेद प्रकट करता हूं। मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।”
उन्होंने कहा कि भाजपा पिछले करीब 17 साल सत्ता में रही। अगर भाजपा की नीयत मंडल कमीशन की 40 सिफारिशों को लागू करने की होती तो अब तक कर देती, भाजपा के हाथ में क्या इतने दिन मेहंदी लगी थी।
मुकेश सहनी ने अपनी सुरक्षा वापस लिए जाने के सवाल पर कहा कि बयान देने के कुछ ही समय के बाद उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई। सुरक्षा देना या वापस लेने की एक प्रक्रिया होती है।
उन्होंने आगे कहा, “मैं निषादों के लिए पिछले कई वर्षों से संघर्ष कर रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा। अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ना अगर गुनाह है तो फांसी पर लटका दीजिए। लेकिन, संघर्ष का रास्ता नहीं छोडूंगा।”
–आईएएनएस
एमएनपी/एबीएम
पटना, 1 मई (आईएएनएस)। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के नेता और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए विवादित बयान पर सफाई पेश की। उन्होंने अपने बयान पर खेद जताते हुए कहा कि बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।
पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए कि उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी को लेकर मैंने कोई विवादास्पद बयान नहीं दिया था, फिर भी अगर किसी को उस बयान से दुख पहुंचा हो, तो मैं इसके लिए खेद प्रकट करता हूं। मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।”
उन्होंने कहा कि भाजपा पिछले करीब 17 साल सत्ता में रही। अगर भाजपा की नीयत मंडल कमीशन की 40 सिफारिशों को लागू करने की होती तो अब तक कर देती, भाजपा के हाथ में क्या इतने दिन मेहंदी लगी थी।
मुकेश सहनी ने अपनी सुरक्षा वापस लिए जाने के सवाल पर कहा कि बयान देने के कुछ ही समय के बाद उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई। सुरक्षा देना या वापस लेने की एक प्रक्रिया होती है।
उन्होंने आगे कहा, “मैं निषादों के लिए पिछले कई वर्षों से संघर्ष कर रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा। अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ना अगर गुनाह है तो फांसी पर लटका दीजिए। लेकिन, संघर्ष का रास्ता नहीं छोडूंगा।”
–आईएएनएस
एमएनपी/एबीएम