जबलपुर. बिना अधिग्रहण तथा मुआवजा दिये निजी जमीन पर सार्वजनिक सडक बनाये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में डॉक्टर दम्पति ने याचिका दायर की थी. याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
याचिकाकर्ता सागर निवासी चैतन्य महाप्रभु हास्पिटल के संचालक डा. प्रियशरण सिंह ठाकुर व डा.लक्ष्मी ठाकुर की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा तिली तिराहे से मेडिकल कालेज होते हुए परकोटा तक मुख्य सड़क का उन्नयन किया जा रहा है. उन्नयन कार्य विकास योजना सागर-2031 में प्रस्तावित चौड़ाई के अंतर्गत किया जा रहा है.
इस कार्य में याचिकाकर्ता की संपत्ति, जो कि नगर निगम सागर की सीमा के अंदर है, उसकी आठ मीटर बाउंड्री आ रही है. नगर पालिक निगम अधिनियम-1956 की धाराओं के अंतर्गत हटाने का निर्णय लिया गया है.
सार्वजनिक सड़क के बीच में याचिकाकर्ता का निर्माण बाधक बनने का आंकलन स्मार्ट सिटी इंजीनियर ने किया है. जिससे साफ है कि बाउंड्री का निर्माण अवैध तरीके से सड़क की शासकीय भूमि पर किया गया है. वास्तविकात में बाउंड्री याचिकाकर्ता के स्वामित्व की वैध भूमि पर बनी है.
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इसके बावजूद भूमि अधिग्रहण व मुआवजा की प्रक्रिया अपनाए बिना निजी स्वामित्व की भूमि का निर्माण अतिक्रमण व अवैध निर्माण निरूपित कर तोड़ने की कार्रवाई मनमानी तरीके से की जा रही है. याचिका की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने सिलसिले में राज्य शासन, कलेक्टर सागर, निगमायुक्त सागर, एसडीओपी सागर व तहसीलदार गोपालगंज को नोटिस जारी किए गए हैं.
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