हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”
–आईएएनएस
एकेजे
ADVERTISEMENT
हैदराबाद, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (केएलआईपी) के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के एक हिस्से के डूबने की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति को तेलंगाना भेजा है।
छह सदस्यीय समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल जैन कर रहे हैं, जो बाद में हैदराबाद में राज्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।
इसके बाद टीम जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बैराज का दौरा करेगी।
केंद्रीय मंत्रालय ने समिति को बैराज का निरीक्षण करने और सभी हितधारकों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
मंत्रालय के अनुसार, 21 अक्टूबर की रात बैराज के ब्लॉक 7 की पिलर संख्या 20 के आंशिक रूप से डूबने के बाद बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक की पिलर संख्या 15 से 20 तक धंस गए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि बैराज के पिलरों के डूबने के कारणों की जांच के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की अनुसूची-2 के पैरा 8 के अनुरूप एक समिति का गठन किया गया है।
टीम को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों और बैराज के निर्माण में शामिल एजेंसी के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के कारण गोदावरी नदी के आर-पार महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से तेलंगाना को जोड़ने वाले बैराज के पुल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पिलर टूटने के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए परियोजना अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की।
बैराज 1.6 किमी लंबा है और जो हिस्सा आंशिक रूप से डूबा है वह महाराष्ट्र से केवल 356 मीटर दूर है।
केएलआईपी अधिकारियों ने सटीक कारण और क्षति के तकनीकी मूल्यांकन के लिए बैराज के कुल 85 गेटों में से लगभग 22 को खोलकर संग्रहित पानी को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
हालांकि, परियोजना इंजीनियरों ने कहा कि बैराज को कोई खतरा नहीं है।
क्षति का आंकलन कर मरम्मत करायी जायेगी।
इस घटना पर विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने खराब डिजाइन और काम की निम्न गुणवत्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से जिम्मेदारी लेने को कहा।
कांग्रेस ने मौजूदा न्यायाधीश से इसकी जांच कराने की मांग की है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार निरीक्षण के लिए जा रहे मीडियाकर्मियों और विपक्षी नेताओं को रोककर घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन से न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को भी कालेश्वरम परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि 1.20 लाख करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेगा परियोजना के पिलरों के डूबने से भ्रष्टाचार का पता चला है।
उन्होंने केसीआर के परिवार पर परियोजना में पैसा कमाने का आरोप लगाते हुये कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी हालिया तेलंगाना यात्रा के दौरान इसे दोहराया था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके दुनिया की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना होने का दावा करने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के पंप डूब गए और अब पिलर भी डूब रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि केएलआईपी और कुछ नहीं बल्कि केसीआर का घोटाला है। उसने दावा किया कि केंद्र ने केंद्रीय मंत्री और राज्य भाजपा अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी के हस्तक्षेप के बाद एक समिति का गठन किया।
किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इंजीनियरों और विशेषज्ञों को साइट पर जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
किशन रेड्डी ने कहा, ”लंबे समय से इंजीनियर इस परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह व्यक्त करते रहे हैं और यह सही साबित हुआ। मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने इस परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया है। 80 हजार किताबें पढ़ने का दावा करने वाले चन्द्रशेखर राव इंजीनियर बन गए और इंजीनियरों की बात पर ध्यान दिए बिना परियोजना का निर्माण करा दिया। परियोजना का बजट अनुमान बढ़ा दिया गया और परियोजना के नाम पर जनता का पैसा लूटा गया।” उन्होंने कहा कि निर्माण के तीन साल के भीतर परियोजना का वह हिस्सा डूब गया था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “अतीत में भारी बाढ़ के कारण परियोजना के पंप हाउस डूब गए थे। अब प्रोजेक्ट का एक हिस्सा धंस गया है। प्रोजेक्ट की खामियां एक के बाद एक सामने आ रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 150 टीएमसीएफटी पानी लिफ्ट कर नीचे छोड़ा गया। कृषि क्षेत्र को 400 टीएमसीएफटी पानी देने का वादा करने वाले मुख्यमंत्री बताएं कि सिंचाई के लिए कितना पानी दिया गया।”