नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति इस साल जनवरी में घटकर 5.1 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर 2023 में 5.69 प्रतिशत थी। इससे घरेलू बजट में कुछ राहत मिली।
खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
आंकड़ों से पता चलता है कि सब्जियों की कीमतें 27.03 प्रतिशत तक बढ़ गईं, जो दिसंबर के दौरान 31.34 प्रतिशत से कम थी। जहां तक दालों का सवाल है, कोई राहत नहीं मिली। वे 19.54 प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि मसाले 16.36 प्रतिशत महंगे हो गए। अनाज की कीमतें जनवरी में 7.83 फीसदी बढ़ीं, जो दिसंबर में 9.53 फीसदी थीं।
उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अब आरबीआई के 2-6 प्रतिशत टारगेट के बीच से थोड़ा ऊपर है। यही कारण है कि आरबीआई आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती नहीं कर रहा है।
आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना चाहता है और उसने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षाओं में लगातार छह बार रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।
–आईएएनएस
एसकेपी/
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नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति इस साल जनवरी में घटकर 5.1 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर 2023 में 5.69 प्रतिशत थी। इससे घरेलू बजट में कुछ राहत मिली।
खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
आंकड़ों से पता चलता है कि सब्जियों की कीमतें 27.03 प्रतिशत तक बढ़ गईं, जो दिसंबर के दौरान 31.34 प्रतिशत से कम थी। जहां तक दालों का सवाल है, कोई राहत नहीं मिली। वे 19.54 प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि मसाले 16.36 प्रतिशत महंगे हो गए। अनाज की कीमतें जनवरी में 7.83 फीसदी बढ़ीं, जो दिसंबर में 9.53 फीसदी थीं।
उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अब आरबीआई के 2-6 प्रतिशत टारगेट के बीच से थोड़ा ऊपर है। यही कारण है कि आरबीआई आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती नहीं कर रहा है।
आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना चाहता है और उसने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षाओं में लगातार छह बार रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।
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नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति इस साल जनवरी में घटकर 5.1 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर 2023 में 5.69 प्रतिशत थी। इससे घरेलू बजट में कुछ राहत मिली।
खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
आंकड़ों से पता चलता है कि सब्जियों की कीमतें 27.03 प्रतिशत तक बढ़ गईं, जो दिसंबर के दौरान 31.34 प्रतिशत से कम थी। जहां तक दालों का सवाल है, कोई राहत नहीं मिली। वे 19.54 प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि मसाले 16.36 प्रतिशत महंगे हो गए। अनाज की कीमतें जनवरी में 7.83 फीसदी बढ़ीं, जो दिसंबर में 9.53 फीसदी थीं।
उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अब आरबीआई के 2-6 प्रतिशत टारगेट के बीच से थोड़ा ऊपर है। यही कारण है कि आरबीआई आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती नहीं कर रहा है।
आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना चाहता है और उसने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षाओं में लगातार छह बार रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।
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नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा मुद्रास्फीति इस साल जनवरी में घटकर 5.1 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर 2023 में 5.69 प्रतिशत थी। इससे घरेलू बजट में कुछ राहत मिली।
खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
आंकड़ों से पता चलता है कि सब्जियों की कीमतें 27.03 प्रतिशत तक बढ़ गईं, जो दिसंबर के दौरान 31.34 प्रतिशत से कम थी। जहां तक दालों का सवाल है, कोई राहत नहीं मिली। वे 19.54 प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि मसाले 16.36 प्रतिशत महंगे हो गए। अनाज की कीमतें जनवरी में 7.83 फीसदी बढ़ीं, जो दिसंबर में 9.53 फीसदी थीं।
उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अब आरबीआई के 2-6 प्रतिशत टारगेट के बीच से थोड़ा ऊपर है। यही कारण है कि आरबीआई आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती नहीं कर रहा है।
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खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
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खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
आंकड़ों से पता चलता है कि सब्जियों की कीमतें 27.03 प्रतिशत तक बढ़ गईं, जो दिसंबर के दौरान 31.34 प्रतिशत से कम थी। जहां तक दालों का सवाल है, कोई राहत नहीं मिली। वे 19.54 प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि मसाले 16.36 प्रतिशत महंगे हो गए। अनाज की कीमतें जनवरी में 7.83 फीसदी बढ़ीं, जो दिसंबर में 9.53 फीसदी थीं।
उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अब आरबीआई के 2-6 प्रतिशत टारगेट के बीच से थोड़ा ऊपर है। यही कारण है कि आरबीआई आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती नहीं कर रहा है।
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खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
आंकड़ों से पता चलता है कि सब्जियों की कीमतें 27.03 प्रतिशत तक बढ़ गईं, जो दिसंबर के दौरान 31.34 प्रतिशत से कम थी। जहां तक दालों का सवाल है, कोई राहत नहीं मिली। वे 19.54 प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि मसाले 16.36 प्रतिशत महंगे हो गए। अनाज की कीमतें जनवरी में 7.83 फीसदी बढ़ीं, जो दिसंबर में 9.53 फीसदी थीं।
उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अब आरबीआई के 2-6 प्रतिशत टारगेट के बीच से थोड़ा ऊपर है। यही कारण है कि आरबीआई आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती नहीं कर रहा है।
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खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
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आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना चाहता है और उसने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षाओं में लगातार छह बार रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।
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खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
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उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अब आरबीआई के 2-6 प्रतिशत टारगेट के बीच से थोड़ा ऊपर है। यही कारण है कि आरबीआई आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती नहीं कर रहा है।
आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना चाहता है और उसने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षाओं में लगातार छह बार रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।
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खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
आंकड़ों से पता चलता है कि सब्जियों की कीमतें 27.03 प्रतिशत तक बढ़ गईं, जो दिसंबर के दौरान 31.34 प्रतिशत से कम थी। जहां तक दालों का सवाल है, कोई राहत नहीं मिली। वे 19.54 प्रतिशत महंगी हो गईं, जबकि मसाले 16.36 प्रतिशत महंगे हो गए। अनाज की कीमतें जनवरी में 7.83 फीसदी बढ़ीं, जो दिसंबर में 9.53 फीसदी थीं।
उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अब आरबीआई के 2-6 प्रतिशत टारगेट के बीच से थोड़ा ऊपर है। यही कारण है कि आरबीआई आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती नहीं कर रहा है।
आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना चाहता है और उसने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षाओं में लगातार छह बार रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।
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खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
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खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
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खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
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खाद्य मुद्रास्फीति कुल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का लगभग आधा हिस्सा है। यह दिसंबर में 9.05 प्रतिशत से गिरकर जनवरी में 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, महीने के दौरान सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन राहत की बात रही कि कि खाना पकाने के लिए तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।
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उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अब आरबीआई के 2-6 प्रतिशत टारगेट के बीच से थोड़ा ऊपर है। यही कारण है कि आरबीआई आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती नहीं कर रहा है।
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