मुंबई, 9 अगस्त (आईएएनएस)। बीजेपी नेता प्रवीण दरेकर शुक्रवार को महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने उद्धव ठाकरे को लेकर बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा,“ उद्धव ठाकरे व कांग्रेस के मतभेद अब तक केवल सतह पर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन जल्द ही ये मतभेद गंभीर रूप ले लेंगे, क्योंकि उद्धव ठाकरे विधानसभा चुनाव में सीएम का चेहरा बनने के लिए दिल्ली गए थे, और इधर पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि चेहरा बाद में तय होगा। इससे समझ में आ गया कि भविष्य में महाविकास अघाड़ी में क्या होने वाला है।”
वहीं, उन्होंने संजय राउत को लेकर भी अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा, “संजय राउत को अपनी औकात में रहकर बोलना चाहिए। उनको किसी की औकात की बात नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपरा के खिलाफ है। लेकिन संजय राउत अब भटक चुके हैं, और अब वेताल (एक प्रकार का राक्षस) जैसा बोल रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “सभी को वहां समान निधि मिलती है। शिवसेना, भाजपा और राष्ट्रवादी पार्टी के समन्वयक, दोनों उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री मिलकर निधि का वितरण करते हैं। इसलिए निधि की कहीं कोई शिकायत नहीं है, और यदि कोई शिकायत होती भी है, तो उसे पार्टी स्तर पर सुलझा लिया जाता है।”
–आईएएनएस
एसएचके/सीबीटी
मुंबई, 9 अगस्त (आईएएनएस)। बीजेपी नेता प्रवीण दरेकर शुक्रवार को महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने उद्धव ठाकरे को लेकर बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा,“ उद्धव ठाकरे व कांग्रेस के मतभेद अब तक केवल सतह पर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन जल्द ही ये मतभेद गंभीर रूप ले लेंगे, क्योंकि उद्धव ठाकरे विधानसभा चुनाव में सीएम का चेहरा बनने के लिए दिल्ली गए थे, और इधर पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि चेहरा बाद में तय होगा। इससे समझ में आ गया कि भविष्य में महाविकास अघाड़ी में क्या होने वाला है।”
वहीं, उन्होंने संजय राउत को लेकर भी अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा, “संजय राउत को अपनी औकात में रहकर बोलना चाहिए। उनको किसी की औकात की बात नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपरा के खिलाफ है। लेकिन संजय राउत अब भटक चुके हैं, और अब वेताल (एक प्रकार का राक्षस) जैसा बोल रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “सभी को वहां समान निधि मिलती है। शिवसेना, भाजपा और राष्ट्रवादी पार्टी के समन्वयक, दोनों उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री मिलकर निधि का वितरण करते हैं। इसलिए निधि की कहीं कोई शिकायत नहीं है, और यदि कोई शिकायत होती भी है, तो उसे पार्टी स्तर पर सुलझा लिया जाता है।”
–आईएएनएस
एसएचके/सीबीटी