नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने शनिवार को कहा कि महिलाओं ने अपनी योग्यता के आधार पर सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
एसजी मेहता ने सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म लेडीज ग्रुप (एसएलजी) द्वारा आयोजित ‘कानूनी बिरादरी में महिलाओं और उनकी उल्लेखनीय यात्रा का जश्न’ कार्यक्रम में कहा कि ऐतिहासिक रूप से यह गलत धारणा रही है कि महिलाएं कमजोर होती हैं। आजादी से पहले विधायी बाधाएं कानूनी पेशे में उनकी भागीदारी में बाधा डालती थीं।
उन्होंने प्रतीकात्मकता के प्रति आगाह करते हुए इस बात पर जोर दिया कि महिलाएं विशेष कोटा या सम्मान की आवश्यकता के बिना केवल अपनी योग्यता के आधार पर मान्यता और उन्नति की हकदार हैं।
सोसायटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन ने न्यायपालिका और विभिन्न प्रशासनिक भूमिकाओं में महिलाओं की अधिक भागीदारी की आवश्यकता को रेखांकित किया।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला दिया जो कानूनी प्रणाली के भीतर प्रमुख पदों पर महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व का संकेत देते हैं और इस असंतुलन को दूर करने के लिए ठोस प्रयासों का आह्वान किया।
हम्मुराबी एंड सोलोमन पार्टनर्स की मैनेजिंग पार्टनर श्वेता भारती ने लैंगिक विविधता के आर्थिक और व्यावसायिक लाभों पर चर्चा की, और अध्ययनों के हवाले से बताया कि कैसे विविध संरचना वाली टीमों में महिलाएँ बेहतर निर्णय लेती हैं और बेहतर प्रदर्शन करती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में कानूनी पेशे में महिलाओं के लिए चुनौतियों तथा अवसरों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी के महत्व सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रिया हिंगोरानी जैसे पैनलिस्टों ने कानून में महिलाओं के सामने आने वाली असफलताओं, प्रगति और उभरती चुनौतियों को रेखांकित करने वाले सत्रों में योगदान दिया।
चर्चाओं में कोर्ट रूम से बोर्ड रूम तक संक्रमण में महिलाओं की भूमिका पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें निर्णय लेने के क्षेत्रों में अधिक प्रतिनिधित्व और समावेशिता की आवश्यकता की ओर इशारा किया गया।
–आईएएनएस
एकेजे/
नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने शनिवार को कहा कि महिलाओं ने अपनी योग्यता के आधार पर सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
एसजी मेहता ने सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म लेडीज ग्रुप (एसएलजी) द्वारा आयोजित ‘कानूनी बिरादरी में महिलाओं और उनकी उल्लेखनीय यात्रा का जश्न’ कार्यक्रम में कहा कि ऐतिहासिक रूप से यह गलत धारणा रही है कि महिलाएं कमजोर होती हैं। आजादी से पहले विधायी बाधाएं कानूनी पेशे में उनकी भागीदारी में बाधा डालती थीं।
उन्होंने प्रतीकात्मकता के प्रति आगाह करते हुए इस बात पर जोर दिया कि महिलाएं विशेष कोटा या सम्मान की आवश्यकता के बिना केवल अपनी योग्यता के आधार पर मान्यता और उन्नति की हकदार हैं।
सोसायटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन ने न्यायपालिका और विभिन्न प्रशासनिक भूमिकाओं में महिलाओं की अधिक भागीदारी की आवश्यकता को रेखांकित किया।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला दिया जो कानूनी प्रणाली के भीतर प्रमुख पदों पर महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व का संकेत देते हैं और इस असंतुलन को दूर करने के लिए ठोस प्रयासों का आह्वान किया।
हम्मुराबी एंड सोलोमन पार्टनर्स की मैनेजिंग पार्टनर श्वेता भारती ने लैंगिक विविधता के आर्थिक और व्यावसायिक लाभों पर चर्चा की, और अध्ययनों के हवाले से बताया कि कैसे विविध संरचना वाली टीमों में महिलाएँ बेहतर निर्णय लेती हैं और बेहतर प्रदर्शन करती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में कानूनी पेशे में महिलाओं के लिए चुनौतियों तथा अवसरों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी के महत्व सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रिया हिंगोरानी जैसे पैनलिस्टों ने कानून में महिलाओं के सामने आने वाली असफलताओं, प्रगति और उभरती चुनौतियों को रेखांकित करने वाले सत्रों में योगदान दिया।
चर्चाओं में कोर्ट रूम से बोर्ड रूम तक संक्रमण में महिलाओं की भूमिका पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें निर्णय लेने के क्षेत्रों में अधिक प्रतिनिधित्व और समावेशिता की आवश्यकता की ओर इशारा किया गया।
–आईएएनएस
एकेजे/