नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने पांच और भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। इनमें मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाएं शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
–आईएएनएस
एफएम/जीकेटी
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नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने पांच और भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। इनमें मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाएं शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने पांच और भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। इनमें मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाएं शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने पांच और भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। इनमें मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाएं शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने पांच और भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। इनमें मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाएं शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
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इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।
–आईएएनएस
एफएम/जीकेटी
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नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने पांच और भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। इनमें मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाएं शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच और भाषाओं को “शास्त्रीय” के रूप में मान्यता देने के फैसले को मंजूरी दी है। मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल किया गया है।
इससे पहले ही तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।
दरअसल, भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 2004 को “शास्त्रीय भाषाओं” के रूप में भाषाओं की एक नई श्रेणी बनाने का फैसला किया था, जिसके तहत तमिल को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था। सरकार ने शास्त्रीय भाषा के तहत दर्जा देने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए थे। इसमें ग्रंथों की उच्च प्राचीनता या एक हजार वर्षों से अधिक का इतिहास देखा जाएगा।
इसके अलावा प्राचीन साहित्यिक ग्रंथों का एक समूह, जिसे बोलने वालों की पीढ़ियों के लिए एक मूल्यवान विरासत माना जाता है। साथ ही साहित्यिक परंपरा मौलिक होनी चाहिए और दूसरे भाषा समुदाय से नहीं ली जानी चाहिए।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादमी के तहत नवंबर 2004 में शास्त्रीय भाषा के दर्जे के लिए प्रस्तावित भाषाओं की जांच करने के लिए एक भाषा विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। नवंबर 2005 में इसके नियमों में कुछ और संशोधन किया और इसके बाद संस्कृत को शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया।