यह रूस के राष्ट्रपति पुतिन की विस्तारवादी आकांक्षा,सनक और व्यक्तिगत अहम के कारण पूरा विश्व अशांति की कगार पर आ गया है। रूस यूक्रेन युद्ध को पूरे 1 वर्ष होने जा रहे हैं पर युद्ध थमता नहीं दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के लाखों सैनिक, नागरिक हलकान परेशान हैं और मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। यूक्रेन के बच्चे ,नागरिक दूसरे देशों में शरणार्थी बनकर रह रहे हैं मानवता सिसक रही है संवेदना करा रही है पर रूस और यूक्रेन के के हुक्मरानों को मानवता से कोई लेना-देना ना होकर केवल अपने अहम पर टिके रहने की कवायद जारी है। अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस और यूरोप के अन्य देश रूस और यूक्रेन की इस लड़ाई की आग में अपना हाथ सेकने में व्यस्त । इस लड़ाई से वैश्विक शांति की स्थिति अत्यंत सोचनीय है और चिंतनीय भी हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादीमीर जेलेंस्की की अपरिपक्वता और जिद के कारण ही यूक्रेन के निर्दोष नागरिक युद्ध की विभीषिका को बुरी तरह से झेल कर अपनी जान गवा रहे हैं। यह तो सारा विश्व जानता है कि पुतिन बहुत ही शक्तिशाली एवं परमाणु शक्ति संपन्न देश के राष्ट्रपति हैं, वे अपने पड़ोसियों की नाफरमानी को बर्दाश्त करने वालों में से नहीं है। सोवियत रूस से अलग होने के बाद जब से जेलेंस्की राष्ट्रपति बने वह अपनी नैटो देश के सदस्य बनने की जिद और यूरोपीय देशों से कंधे से कंधा मिलाकर रूस के विरोध में हमेशा आवाज उठाने वाले व्यक्ति रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति जानते हैं कि रूस एक ताकतवर देश है ऐसे में उसे लगातार विचलित करने का प्रयास उनके लिए आत्मघाती होगा और वहां की जनता के लिए मौत का आव्हान ही होगा, इसके बावजूद उन्होंने रूस से युद्ध लड़ने की अपनी जिद को रोक नहीं पाए।
दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति विस्तारवादी नीति,अपरिपक्व निर्णय और यूक्रेन को झूठा समर्थन देकर उसे युद्ध के लिए लगातार भड़का कर अब सहयोग देने के नाम पर हाथ ऊपर खड़े कर दिए हैं। वैसे इस युद्ध में यूक्रेन की जनता का जितना नुकसान हुआ है वह किसी भी हालात में पूरा नहीं किया जा सकता, जिन सैनिकों,भोले नागरिकों की जान चली गई उन्हें फिर से जिंदा नहीं किया जा सकता है। इसका बड़ा कारण यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की युद्ध लगातार जारी रखने की जिद ही है। पुतिन का सदैव मकसद रहा है की यूक्रेन के राष्ट्रपति को बदलकर उनके समर्थित पूर्व राष्ट्रपति को यूक्रेन का राष्ट्रपति बनाया जाए ,इस तरह वर्तमान राष्ट्रपति का तख्ता पलट कर शासन तंत्र किसी उनके अपने समर्थित व्यक्ति को दिया जाए।दूसरा यह कि अमेरिका की मदद से यूक्रेन परमाणु बम बनाने के लगातार प्रयास कर रूस की शांति को भंग करना चाहता है। तीसरा यह कि यूक्रेन रूस की हर तरह की गतिविधियों का लगातार विरोध करता है। पर इन सब की प्रक्रिया के फल स्वरुप यूक्रेन की जनता युद्ध की विभीषिका के नीचे सिसक रही है रो रही है एवं पलायन करने को मजबूर है। न्यूज़ एजेंसियों के अनुसार यूक्रेन से लगभग 10 लाख नागरिक पोलैंड, रोमानिया और अन्य राज्यों में शरणार्थियों की तरह देश छोड़ चुके हैं, एवं दूसरे देश में कष्टकर जीवन बिताने को मजबूर हुए हैं। यह अमेरिका ,रूस तथा यूक्रेन की अकड़ का परिणाम है कि लाखों लोग युद्ध की भयानक कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी जान बचाने के लिए मोहताज हैं। आज मानवता रो रही है सिसक रही है, कराह रही है, ऐसे में न तो संयुक्त राष्ट्र संघ और ना ही नेटो देश के सदस्य और ना ही यूरोपियन कमेटी के तमाम देश ही इन निर्दोष नागरिकों की मदद कर पा रहे हैं। युद्ध किसी भी समस्या का स्थाई हल नहीं होता है अनेक देशों के राष्ट्रपतियों के अकारण गुरुर, क्रोध और ज़िद के कारण लाखों लोग बेघर हो गए हैं और हजारों की जान भी चली गई है। इसकी भरपाई भला कौन कर सकता है। ज़िद और क्रोध की परिणति सदैव ही पश्चाताप में ही होती है। भारत ने भी स्वतंत्रता के समय भारत विभाजन के समय यह विभीषिका झेली थी और युद्ध के परिणामों को भारतीय जनमानस अच्छी तरह समझता हैं। ऐसा नहीं है कि यह पहला ही युद्ध हुआ है,इतिहास में ऐसे अनेक युद्ध हुए हैं जिसमें वहां की जनता एवं वहां का नागरिक युद्ध की त्रासदी हिंसा की विभीषिका और परमाणु युद्ध के परिणामों को बुरी तरह अनुभव कर चुका है। क्या यह बात तो रूस के राष्ट्रपति, अमेरिकी राष्ट्रपति और यूक्रेन के राष्ट्रपति नहीं जानते हैं, किंतु अपनी विस्तार वादी नीतियों एवं अनावश्यक जिद, गुरुर के कारण लाखों नागरिकों को मौत के मुंह में धकेल दिया है। युद्ध में यदि यूरोपियन देश और नैटो देश के सदस्य यूक्रेन की सेना को किसी भी तरह की मदद करते हैं तो विश्व युद्ध की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसी परिस्थिति में पूरे विश्व में मानवता के लिए बहुत भीषण संकट आन पड़ेगा और भविष्य में शांति, सौहार्द और सामंजस्य की बातों पर कोई भी देश या नागरिक विश्वास नहीं करेगा ।इसीलिए युद्ध की तमाम बातों को छोड़कर शांति स्थापना के लिए पूरे विश्व के देशों को प्रयास कर मानवता की रक्षा की ओर अग्रसर होना चाहिए।
संजीव ठाकुर, चिंतक, लेखक, रायपुर छत्तीसगढ़।