नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।
–आईएएनएस
जीसीबी/एसकेपी
ADVERTISEMENT
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। वंचितों को शिक्षा मुहैया करने के लिए शरद विवेक सागर (पटना, बिहार) को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
इसी तरह श्रीअन्न (मिलेट्स) के संरक्षण व संवर्धन के मौलिक कार्य हेतु लहरीबाई पडिया (डिंडोरी, मध्य प्रदेश) को, तथा दिव्यांगों के जीवनस्तर को बेहतर और आत्मविश्वास युक्त बनाने के लिएडॉ वैभव भंडारी (पाली, राजस्थान) को यशवंतराव केलकर पुरस्कार दिया गया है।
रविवार को यह समारोह दिल्ली के बुराड़ी स्थित डीडीए ग्राउंड में विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन निमित्त बसाई गई टेंट सिटी में हुआ। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्रा. यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का शिल्पकार भी कहा जाता है।
अभाविप के मुताबिक, अभाविप का वैचारिक अधिष्ठान, कार्यकर्ता विकास तथा कार्यपद्धति को स्थापित व निर्धारित करने में प्रा. यशवंतराव केलकर की महती भूमिका थी। पुरस्कार का उद्देश्य युवा सामाजिक परिवर्तनकारियों के कार्य को उजागर करना है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद लहरीबाई पडिया ने कहा कि मोटे अनाज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं, हमें इसका उपयोग करना चाहिए। भारतीय आहार व्यवस्था अत्यंत समृद्ध तथा पोषणयुक्त रही है, हमारी पीढ़ी के युवाओं को स्वस्थ रहने के लिए अपना खान-पान ठीक रखना होगा।
यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित शरद विवेक सागर ने कहा कि अभाविप 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मिला यह पुरस्कार मैं अपने पूर्व में मिले सभी पुरस्कारों से पृथक और पवित्र मानता हूं। यह पुरस्कार मेरे लिए विशिष्ट है।
वहीं डॉ वैभव भंडारी ने कहा कि मैंने सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया और अपनी दिव्यांगता के संघर्ष को कभी आड़े नहीं आने दिया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजशरण शाही ने कहा कि यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व विजन को एक्शन में परिवर्तित करने वाला रहा है। वैचारिक अधिष्ठान की विशिष्टता विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति की पहचान है। आज जिन तीन युवाओं को यह पुरस्कार मिला है, वह समाज में बेहतरी लाने का काम कर रहे हैं। यशवंतराव केलकर ने समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर करने वाले युवाओं को प्रेरित किया। उनकी स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा देगा।