चंडीगढ़, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद को लेकर हो रही कालाबाजी पर प्रशासन ने सख्त रूख अख्तियार किया है। कृषि विभाग के उपनिदेशक सुखदेव सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक नया प्रोजेक्ट पास हुआ है, जिसके तहत नई फैक्ट्रियों की स्थापना की योजना है। कुल मिलाकर विभाग खाद की उपलब्धता और वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।”
–आईएएनएस
एसएचके/एएस
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चंडीगढ़, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद को लेकर हो रही कालाबाजी पर प्रशासन ने सख्त रूख अख्तियार किया है। कृषि विभाग के उपनिदेशक सुखदेव सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक नया प्रोजेक्ट पास हुआ है, जिसके तहत नई फैक्ट्रियों की स्थापना की योजना है। कुल मिलाकर विभाग खाद की उपलब्धता और वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक नया प्रोजेक्ट पास हुआ है, जिसके तहत नई फैक्ट्रियों की स्थापना की योजना है। कुल मिलाकर विभाग खाद की उपलब्धता और वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक नया प्रोजेक्ट पास हुआ है, जिसके तहत नई फैक्ट्रियों की स्थापना की योजना है। कुल मिलाकर विभाग खाद की उपलब्धता और वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक नया प्रोजेक्ट पास हुआ है, जिसके तहत नई फैक्ट्रियों की स्थापना की योजना है। कुल मिलाकर विभाग खाद की उपलब्धता और वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक नया प्रोजेक्ट पास हुआ है, जिसके तहत नई फैक्ट्रियों की स्थापना की योजना है। कुल मिलाकर विभाग खाद की उपलब्धता और वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक नया प्रोजेक्ट पास हुआ है, जिसके तहत नई फैक्ट्रियों की स्थापना की योजना है। कुल मिलाकर विभाग खाद की उपलब्धता और वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक नया प्रोजेक्ट पास हुआ है, जिसके तहत नई फैक्ट्रियों की स्थापना की योजना है। कुल मिलाकर विभाग खाद की उपलब्धता और वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
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उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
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उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
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उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक नया प्रोजेक्ट पास हुआ है, जिसके तहत नई फैक्ट्रियों की स्थापना की योजना है। कुल मिलाकर विभाग खाद की उपलब्धता और वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।”
–आईएएनएस
एसएचके/एएस
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चंडीगढ़, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद को लेकर हो रही कालाबाजी पर प्रशासन ने सख्त रूख अख्तियार किया है। कृषि विभाग के उपनिदेशक सुखदेव सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कहा, “हरियाणा के सिरसा में डीएपी खाद वितरण की स्थिति पर बात करें, तो वर्तमान में रबी सीजन की मांग के अनुसार विभाग द्वारा उचित कदम उठाए जा रहे हैं। रबी सीजन के लिए 41,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 17,000 मीट्रिक टन डीएपी किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। आगे की मांग भी विभाग ने भेजी है, जिसमें 25-26 अक्टूबर के बाद और डीएपी की आपूर्ति की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “इस बार खाद की 40 फीसद मात्रा को भेजा जा रहा है। सिरसा जिले में एनपीके खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है, जिसमें विभिन्न ग्रेड शामिल हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी के साथ एनपीके का भी उपयोग करें, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकता पूरी हो सके।”
उन्होंने आगे कहा, “कालाबाजारी की रोकथाम के लिए विभाग ने विशेष टीमों का गठन किया है, जो मंडियों में खाद की वितरण प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं। खाद की आपूर्ति केवल विभाग की उपस्थिति में की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कालाबाज़ारी न हो सके। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं पर भी अधिकारी सक्रिय हैं और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक नया प्रोजेक्ट पास हुआ है, जिसके तहत नई फैक्ट्रियों की स्थापना की योजना है। कुल मिलाकर विभाग खाद की उपलब्धता और वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।”