जम्मू कश्मीर, 5 अगस्त (आईएएनएस)। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में स्ट्रीट वेंडरों के व्यवसाय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
–आईएएनएस
एकेएस/एकेजे
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जम्मू कश्मीर, 5 अगस्त (आईएएनएस)। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में स्ट्रीट वेंडरों के व्यवसाय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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जम्मू कश्मीर, 5 अगस्त (आईएएनएस)। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में स्ट्रीट वेंडरों के व्यवसाय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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जम्मू कश्मीर, 5 अगस्त (आईएएनएस)। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में स्ट्रीट वेंडरों के व्यवसाय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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जम्मू कश्मीर, 5 अगस्त (आईएएनएस)। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में स्ट्रीट वेंडरों के व्यवसाय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
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इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
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कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
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इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। इससे स्ट्रीट वेंडरों का कारोबार भी बढ़ा है। हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय व्यंजनों जैसे विभिन्न प्रकार के सामान बेचने वाले विक्रेताओं ने अपने मुनाफे में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की है जिससे उन्हें अपनी आजीविका में सुधार करने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद मिली है।
इसके अलावा, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों के कारण स्थानीय उत्पादों की मांग में भी बढ़ी है। व्यवसायों के सुचारू संचालन से विक्रेताओं को आर्थिक तौर पर मदद मिली है।
कुल मिलाकर, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक समृद्धि और अवसरों का एक नया युग आया है, जिससे वे फलने-फूलने और क्षेत्र की वृद्धि और विकास में योगदान करने में सक्षम हुए हैं।
बारामुला शहर के कई रेहड़ी-पटरी वालों ने कहा कि यहां स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ था, लेकिन पिछले पांच साल से वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तथा भविष्य दे पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।