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Home ताज़ा समाचार

सीएम योगी की आईएफसी ग्लोबल के एमडी से मुलाकात, निवेश में हरसंभव मदद का मिला आश्वासन

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October 5, 2024
in ताज़ा समाचार
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लखनऊ, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करने और प्रदेश के बुनियादी ढांचे एवं कृषि तकनीक में सहयोग करने के लिए उत्सुक इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईएफसी) के ग्लोबल एमडी मख्तार डियोप ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की।

मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

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बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

–आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

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लखनऊ, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करने और प्रदेश के बुनियादी ढांचे एवं कृषि तकनीक में सहयोग करने के लिए उत्सुक इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईएफसी) के ग्लोबल एमडी मख्तार डियोप ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की।

मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

–आईएएनएस

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मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

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मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

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मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

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मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

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मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

–आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

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लखनऊ, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करने और प्रदेश के बुनियादी ढांचे एवं कृषि तकनीक में सहयोग करने के लिए उत्सुक इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईएफसी) के ग्लोबल एमडी मख्तार डियोप ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की।

मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

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मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

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मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

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आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

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मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

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बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

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मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

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आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

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लखनऊ, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करने और प्रदेश के बुनियादी ढांचे एवं कृषि तकनीक में सहयोग करने के लिए उत्सुक इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईएफसी) के ग्लोबल एमडी मख्तार डियोप ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की।

मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

–आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

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लखनऊ, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करने और प्रदेश के बुनियादी ढांचे एवं कृषि तकनीक में सहयोग करने के लिए उत्सुक इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईएफसी) के ग्लोबल एमडी मख्तार डियोप ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की।

मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

–आईएएनएस

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लखनऊ, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करने और प्रदेश के बुनियादी ढांचे एवं कृषि तकनीक में सहयोग करने के लिए उत्सुक इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईएफसी) के ग्लोबल एमडी मख्तार डियोप ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की।

मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश में सहयोग को लेकर विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। खासतौर पर आईएफसी की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उत्सुकता जाहिर की गई।

बैठक में आईएफसी की ओर से प्रदेश में नमामि गंगे की तर्ज पर एक राज्यव्यापी जल कार्यक्रम विकसित किए जाने पर भी चर्चा की गई, जो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आईएफसी को सहयोग के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया।

मख्तार डियोप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य का समर्थन करते हुए इसमें अपनी भागीदारी के प्रति उत्सुकता जाहिर की। इसके लिए विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और कृषि तकनीक के माध्यम से फोकस किए जाने की आवश्यकता जताई गई।

आईएफसी विगत कई वर्षों से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। भारत के पहले और सबसे बड़े बिजली क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट इंडीग्रिड में आईएफसी ने 200 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी मदद से भारत के ट्रांसमिशन सेक्टर का आधुनिकीकरण हो रहा है। वहीं, आईएफसी पीपीपी परियोजनाओं के सलाहकार के रूप में भी सक्रिय है।

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप, राज्य सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कम से कम सात शहर (कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज) हैं, जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, जो इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

आईएफसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप संयुक्त रूप से राज्य के लिए पूल्ड फाइनेंसिंग संरचना स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे में निजी पूंजी को आकर्षित किया जा सके। एक पूल्ड कमर्शियल फाइनेंसिंग संरचना उत्तर प्रदेश राज्य की वित्तीय ताकत का उपयोग कर शहरी बुनियादी ढांचे की सामूहिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है।

आईएफसी के सहयोग से वर्ल्ड बैंक ग्रुप 100 शहरों के कार्यक्रम के समर्थन से, एक राज्य मध्यस्थ सरकारी गारंटी या क्रेडिट वृद्धि के साथ एक पूल आधार पर बांड जुटा सकता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ डब्ल्यूबीजी-एडीजी 100 शहरों के कार्यक्रम का उद्देश्य 100 शहरों में जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवा में बैंक योग्य परियोजनाओं को वितरित करना है। यह कार्यक्रम अभी प्रारंभिक चरणों में है।

आईएफसी ने 2007 से अब तक रसायन और उर्वरक, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में 29 परियोजनाओं में लगभग 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। प्रदेश सरकार के पीपीपी मॉडल को बढ़ावा देने के प्रयासों में, आईएफसी ने जुलाई 2023 में उत्तर प्रदेश के अवसंरचना और औद्योगिक विकास विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया है, जिसके तहत आईएफसी पीपीपी के रूप में ई-बसों की खरीदारी, संचालन और रखरखाव की सलाहकारी सेवाएं प्रदान कर रहा है।

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