ग्वालियर. मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थित सांदीपनि पद्माराजे शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कंपू में यूनिफॉर्म वितरण में बड़ी लापरवाही सामने आई है. स्कूल प्रबंधन ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं को पिछले सत्र की ड्रेस बांटी है, जो अब उनके लिए छोटी साबित हो रही है. इससे छात्राएं परेशान हैं और कई ने यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल आना बंद कर दिया है.
क्या है मामला?
स्कूल द्वारा छात्राओं से पिछले वर्ष यूनिफॉर्म का साइज (नंबर) लेकर पोर्टल पर डिमांड भेजी गई थी.
यूनिफॉर्म का टेंडर राज्य स्तर पर हुआ, लेकिन ड्रेस अप्रैल में ही तैयार हुई.
नियमानुसार, इन ड्रेसों का वितरण पिछले सत्र में होना था, लेकिन स्कूल ने अब जुलाई 2025 में इनका वितरण किया.
एक साल बाद वितरित की गई ड्रेस छात्राओं को छोटी पड़ रही है, क्योंकि शारीरिक विकास के कारण अब उनका ड्रेस नंबर बढ़ चुका है.
छात्राओं की परेशानी:
कई छात्राएं पहले ही 765 रुपये देकर पिछले सत्र की यूनिफॉर्म खरीद चुकी थीं.
अब उन्हें पुरानी यूनिफॉर्म दोबारा मिली है जो फिट नहीं आ रही, जिससे वे बिना यूनिफॉर्म के स्कूल आ रही हैं.
यही स्थिति कक्षा 1 से 5 तक की छात्राओं के साथ भी है, जिन्हें इस सत्र में पिछले सत्र की ड्रेस दी गई.
अभिभावकों की नाराज़गी:
“बेटी का नंबर हमने स्कूल को दिया था, लेकिन अब वो ड्रेस छोटी हो गई है. नए सत्र में नई ड्रेस मिलनी चाहिए थी, लेकिन हमें पुरानी ही दे दी गई.” – एक अभिभावक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया.
कई माता-पिता ने इस पर प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
स्कूल प्रिंसिपल का बयान:
रविंद्र शर्मा, प्राचार्य – सांदीपनि पद्माराजे शासकीय कन्या विद्यालय, कंपू:
“यह सही है कि यूनिफॉर्म वितरण में देरी हुई है. यह प्रक्रिया स्टेट लेवल पर होती है. इस बार हम कोशिश करेंगे कि छात्राओं के दिए गए नंबर से दो नंबर अधिक यूनिफॉर्म की डिमांड पोर्टल पर दर्ज कराएं, ताकि अगले साल ये परेशानी न हो.”
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प्रमुख समस्याएं:
वितरण में प्रशासनिक लापरवाही
शारीरिक विकास को नजरअंदाज कर पुराने साइज की ड्रेस देना
छात्राओं की स्वाभाविक असहजता और पढ़ाई पर असर
मांग क्या उठ रही है?
इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए.
छात्रों को नई ड्रेस शीघ्र उपलब्ध कराई जाए.
भविष्य में ड्रेस वितरण की समयबद्ध और मापदंड-आधारित योजना तैयार की जाए.