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160 फीट की ऊंचाई से गिरता शीतल जलप्रपात, ठंडक-प्राकृतिक खूबसूरती का संगम, यहीं श्रीकृष्ण करते थे स्नान


नवादा, 21 मई (आईएएनएस)। देश भर के कई हिस्सों में तिलचिलाती धूप, गर्म हवा और उमस ने लोगों को बेहाल कर रखा है। ऐसे में प्राकृतिक ठंडक और सुकून की तलाश में पर्यटक प्राकृतिक स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। बिहार के नवादा जिले में स्थित ककोलत जलप्रपात ऐसी ही एक खूबसूरत जगह है, जहां गर्मी में भी ठंडक का अहसास होता है। यहां का शीतल जल और प्राकृतिक नजारा लोगों को लुभाता है।

नवादा, 21 मई (आईएएनएस)। देश भर के कई हिस्सों में तिलचिलाती धूप, गर्म हवा और उमस ने लोगों को बेहाल कर रखा है। ऐसे में प्राकृतिक ठंडक और सुकून की तलाश में पर्यटक प्राकृतिक स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। बिहार के नवादा जिले में स्थित ककोलत जलप्रपात ऐसी ही एक खूबसूरत जगह है, जहां गर्मी में भी ठंडक का अहसास होता है। यहां का शीतल जल और प्राकृतिक नजारा लोगों को लुभाता है।

ककोलत जलप्रपात न सिर्फ गर्मी से राहत देने वाला स्थल है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों और इतिहास के शौकीनों के लिए भी आदर्श जगह है। अगर आप भीषण गर्मी से थक चुके हैं और ठंडक व सुकून की तलाश में हैं, तो नवादा का यह सुरम्य जलप्रपात आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। बिहार में ककोलत जलप्रपात तेजी से लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनता जा रहा है। गर्मियों में यहां पिकनिक मनाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।

ककोलत जलप्रपात अपनी मनमोहक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह लगभग 160 फीट की ऊंचाई से गिरता है। झरने का पानी पूरे साल ठंडा और शीशे सा चमचमाता साफ रहता है, जो गर्मियों में पर्यटकों को खास आकर्षित करता है। झरने के चारों ओर हरी-भरी पहाड़ियां और घने जंगल इसे और भी आकर्षक बना देते हैं।

बिहार के नवादा में बसे ककोलत जलप्रपात का पौराणिक महत्व भी है। लोककथाओं के अनुसार, इस जलप्रपात का गहरा संबंध भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपनी रानियों के साथ आते थे और यहां स्नान भी करते थे। एक अन्य कथा के मुताबिक, त्रेता युग में एक राजा को एक ऋषि ने श्राप दे दिया था, जिसके कारण वह अजगर बनकर इसी जलप्रपात के पास रहने लगे। वनवास के दौरान जब पांडव वहां पहुंचे तो राजा का श्राप समाप्त हो गया। पांडवों ने घोषणा की कि जो कोई भी इस पवित्र जलप्रपात में स्नान करेगा, वह कभी भी सर्प योनि में जन्म नहीं लेगा। इन कथाओं के कारण यहां धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी जुड़ गया है।

पर्यटन स्थल होने के अलावा, यहां चैत संक्रांति और बिषुआ पर्व के मौके पर तीन दिवसीय बड़ा मेला भी लगता है। इस धार्मिक मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलप्रपात में स्नान करने आते हैं।

बिहार सरकार के जल, वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार, ककोलत जलप्रपात अपनी शीतल जलधारा और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यह बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार है। गर्मियों में यहां घूमने आने वाले पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है।

ककोलत जलप्रपात पहुंचना काफी सुगम है, यहां हवाई मार्ग से जाने के लिए निकटतम एयरपोर्ट गया और पटना हैं। दोनों जगहों से देश के प्रमुख शहरों के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं। वहीं, रेल मार्ग से नवादा लखीसराय, बख्तियारपुर और गया रेलवे स्टेशन से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग से नवादा पटना, गया और कोलकाता से सड़क मार्ग से जुड़ा है। ककोलत जलप्रपात नवादा बस स्टैंड से एनएच-31 पर फतेहपुर मोड़ और अकबरपुर ब्लॉक होते हुए करीब 43 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

--आईएएनएस

एमटी/एबीएम

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