
अमेरिका में रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने 'एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट 2026' पेश किया है। एरिज़ोना के सांसद एली क्रेन के नेतृत्व में लाए गए इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य एच-1बी वीजा जारी करने पर तीन साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाना है। सांसदों का तर्क है कि कंपनियां इस कार्यक्रम का गलत इस्तेमाल कर अमेरिकी श्रमिकों की जगह सस्ते विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर रही हैं। इस कदम से न केवल नए वीजा पर रोक लगेगी, बल्कि मौजूदा वीजा धारकों को भी धीरे-धीरे देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
यह विधेयक भारत और चीन के कुशल पेशेवरों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार, कुल एच-1बी वीजा का लगभग 70-80% हिस्सा अकेले भारतीयों को मिलता है। नए प्रस्तावों में वीजा की सालाना सीमा को 65,000 से घटाकर 25,000 करना और न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 2 लाख डॉलर (करीब 1.87 करोड़ रुपये) करना शामिल है। इसके अलावा, एच-4 वीजा (आश्रितों के लिए) को बंद करने और ग्रीन कार्ड हासिल करने के रास्ते को भी ब्लॉक करने का प्रस्ताव है, जिससे भारतीय आईटी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए 'कुशल प्रवासन पाइपलाइन' को नष्ट कर सकता है। हालांकि, इस विधेयक को कानून बनने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों में पारित होना होगा। सीनेट में इसे 60 वोटों के समर्थन की आवश्यकता है, जो एक बड़ी विधायी चुनौती है। कुछ विशेषज्ञ इसे केवल एक राजनीतिक बयानबाजी मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए अब तक का सबसे ठोस कदम बता रहे हैं।
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