Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

50-50 किलो राहत सामग्री दे रही सरकार, 500 ग्राम भी नहीं पहुंचा पाती थी सपा: सीएम योगी


बलिया, 29 अगस्त (आईएएनएस)। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों को करीब 50-50 किलो राहत सामग्री के पैकेट उपलब्ध करा रही है, जबकि सपा सरकार में 500 ग्राम राहत सामग्री भी नहीं पहुंच पाती थी। गरीबों के हक की राहत सपा से जुड़े लोग हड़प लेते थे। आज हर आपदा में आवास समेत तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाती है।

बलिया, 29 अगस्त (आईएएनएस)। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों को करीब 50-50 किलो राहत सामग्री के पैकेट उपलब्ध करा रही है, जबकि सपा सरकार में 500 ग्राम राहत सामग्री भी नहीं पहुंच पाती थी। गरीबों के हक की राहत सपा से जुड़े लोग हड़प लेते थे। आज हर आपदा में आवास समेत तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाती है।

उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार गरीब, नौजवान, माता-बहनों और अन्नदाता किसानों के हक में संवेदनशीलता व ईमानदारी से काम कर रही है। अतिवृष्टि के कारण पिछले कुछ दिनों में करीब 26 जनपद बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सरकार लगातार व तेजी से राहत व बचाव कार्य में जुटी है। बाढ़ से 1.71 लाख से अधिक लोग और 251 गांव प्रभावित हुए हैं। एक हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित शरणालयों में पहुंचाया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को बलिया में तीन विधानसभा क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित गांवों का हवाई निरीक्षण करने के उपरांत 1500 बाढ़ पीड़ित परिवारो को राहत सामग्री और चिकित्सकीय किट वितरित कार्यक्रम में शामिल हुए।

उन्होंने आयोजन स्थल पर मौजूद बाढ़ पीड़ितों से बातचीत की, उनका दुख साझा किया और सबको आश्वस्त किया कि किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं, सरकार हर पीड़ित व्यक्ति के साथ खड़ी है। उन्‍होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटने का काम किया था, सपा उसी की पिछलग्गू बन गई। जिन लोगों ने जयप्रकाश नारायण के सपनों को तार-तार किया, सपा उन्हीं के साथ खड़ी है। इन्होंने जयप्रकाश जी के नाम को किस तरह लूट-खसोट का माध्यम बनाया था, लखनऊ में बना जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएआईसी) उसका उदाहरण है। इस केंद्र की लागत मात्र 200 करोड़ थी। लेकिन, लुटेरी सपा सरकार ने उस पर 864 करोड़ रुपये खर्च किए, और तब भी यह अधूरा रहा। उनकी मंशा जनता-जनार्दन के पैसे से बने इस केंद्र को लूट-खसोट व अय्याशी का अड्डा बनाना थी। ऐसी कोशिश भी की गई।

सीएम ने कहा कि जेपीएआईसी के संचालन से जुड़ी कमेटी में अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव, डिंपल यादव और राजेंद्र चौधरी समेत कई लोगों को शामिल किया गया था। इस तरह केंद्र को व्यक्तिगत संपत्ति के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश हुई। अखिलेश को इसके लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए। यूपी में संसाधनों व प्रतिभा की कमी कभी नहीं थी। प्रदेश का युवा प्रतिभाशाली और ऊर्जावान था, किसान मेहनती था तथा व्यापारी और उद्यमी बनने की क्षमता रखता था। इसके बावजूद पिछली सरकारों की नीतियों और भ्रष्टाचार के कारण प्रदेश पिछड़ गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण करते हुए आए हैं। बांसडीह, बलिया और बैरिया विधानसभा क्षेत्रों में कटान और जलप्लावन से प्रभावित गांवों का निरीक्षण करने के बाद वह लोगों के बीच पहुंचे हैं। राहत कार्यों को लेकर वह लगातार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के संपर्क में रहे तथा कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी स्थिति की समीक्षा की। उद्देश्य यही रहा कि बाढ़ से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को परेशानी न हो।

सीएम ने कहा कि बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत किट उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, दो किलो अरहर की दाल, दो किलो चना, दो किलो भुना चना, एक किलो चीनी, 10 पैकेट बिस्कुट, माचिस, मोमबत्ती, दो नहाने के साबुन और एक तिरपाल शामिल है। इसके अलावा हल्दी, मिर्च, सब्जी मसाला, एक किलो रिफाइंड तेल, एक किलो नमक, सैनिटरी पैड, कपड़े धोने के दो साबुन, तौलिया, सूती कपड़ा, डिस्पोजल बैग, डेटॉल और 10 किलो आलू भी दिया जा रहा है। राहत किट में ढाई किलो लाई, एक बाल्टी, एक मग, एक टॉर्च और एक छतरी भी उपलब्ध कराई जा रही है। बाढ़ प्रभावितों के लिए मेडिसिन किट में ओआरएस पाउडर और आवश्यक दवाएं दी जा रही हैं। साथ ही पर्याप्त मात्रा में क्लोरीन की गोलियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि दूषित पानी से होने वाली समस्याओं से बचाव हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के दौरान सांप, बिच्छू और अन्य विषैले कीड़ों के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कुत्ते के काटने और जंगली जानवरों के हमले की शिकायतें भी सामने आती हैं। इसे देखते हुए सभी सीएचसी और जिला अस्पतालों में एंटी-स्नेक और एंटी-रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सरकार का प्रयास केवल लोगों को सुरक्षित बचाना ही नहीं, बल्कि उनके पशुधन को भी नुकसान से बचाना है। पशुओं के टीकाकरण, दवाओं और उनके लिए जरूरी खाद्य सामग्री की व्यवस्था की जा रही है।

सीएम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं का चिह्नीकरण किया जा रहा है। बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से राहत सामग्री उपलब्ध कराने तथा उनकी विशेष देखभाल की व्यवस्था की जा रही है। यह कार्य इसलिए तेजी से हो पा रहा है, क्योंकि जनता ने अच्छे विधायक चुने हैं। राहत किट वितरण के दौरान हर व्यक्ति को करीब 50 किलो तक सामग्री दी गई है। यह सामग्री वाहनों के माध्यम से उनके घर तक पहुंचाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आपदा और दुर्घटनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए कई राहत व्यवस्थाएं लागू की हैं। सर्पदंश से मृत्यु पर तत्काल चार लाख रुपये की सहायता दी जाती है। 2017 से पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु होने पर भी सरकार सहायता देती है। पागल कुत्ते के काटने से होने वाली दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर भी राहत का प्रावधान है। ऐसे मामलों में परिवार को 24 घंटे के अंदर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

सीएम ने कहा कि किसान, बटाईदार किसान या उनके परिवार के किसी सदस्य की बाढ़ अथवा आकाशीय बिजली से मृत्यु होने पर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये की सहायता दी जाती है। बाढ़ के कारण मकान या झोपड़ी नष्ट होने पर सरकार तत्काल परिवार को नया मकान बनाने के लिए जमीन का पट्टा उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी स्वीकृत किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने बलिया में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान का भरोसा दिलाते हुए कहा कि जल शक्ति मंत्री को इस संबंध में व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मैंने स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया है और कई स्थानों पर घाघरा नदी को ड्रेजिंग के माध्यम से चैनलाइज करने की आवश्यकता दिखाई देती है। ड्रेजिंग से निकलने वाली सिल्ट को तटबंध के सामने उपयोग किया जाए। जरूरत वाले स्थानों पर बोल्डर से ठोकर बनाए जाएं, जिससे नदी के कटान को रोका जा सके और बाढ़ का खतरा कम हो।

सीएम ने कहा कि पहले बारिश के दौरान 36-40 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनती थी, जबकि इस बार 26 जनपद प्रभावित हुए हैं। इस बार भी जन-धन की क्षति न्यूनतम रही है और जनहानि लगभग न के बराबर हुई है। सरकार का प्रयास है कि राहत और बचाव के साथ-साथ बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। बलिया के लोगों की प्रतिभा और ऊर्जा को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान और विकास कार्यों को गति देना जरूरी है।

--आईएएनएस

विकेटी/एएसएच

Share:

Leave A Reviews

Related News