नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक सत्र को संबोधित करते हुए संगठन के 20 वर्षों के सफर, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर बात की। उन्होंने कहा कि 'ब्रिक्स-20: मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण' विषय पर आधारित यह सत्र ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ-साथ पार्टनर देशों को भी साथ लाया है।
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नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक सत्र को संबोधित करते हुए संगठन के 20 वर्षों के सफर, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर बात की। उन्होंने कहा कि 'ब्रिक्स-20: मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण' विषय पर आधारित यह सत्र ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ-साथ पार्टनर देशों को भी साथ लाया है।
एस. जयशंकर ने कहा कि पिछले 20 वर्षों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए, हम आज अपने सहयोग की प्रकृति और उसके भविष्य की दिशा पर चर्चा कर रहे हैं। पार्टनर देशों की मौजूदगी ने हमारे सामूहिक प्रयासों को और मजबूत किया है और आपसी जुड़ाव को गहरा किया है। अपनी सामूहिक ताकत का इस्तेमाल करके हम ब्रिक्स को और ज्यादा मजबूत, तेज और बदलती परिस्थितियों के मुताबिक ढलने वाला बना सकते हैं। समय के साथ ब्रिक्स का दायरा और महत्व दोनों बढ़े हैं। यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की उस इच्छा को दर्शाता है, जिसमें वे एक ज्यादा संतुलित और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था चाहते हैं। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार, ब्रिक्स ने अपने एजेंडे और सदस्यता दोनों का विस्तार किया है, लेकिन इसका ध्यान हमेशा लोगों के विकास और व्यावहारिक सहयोग पर बना रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स की यात्रा काफी महत्वपूर्ण रही है। न्यू डेवलपमेंट बैंक और कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट जैसी संस्थाएं इस बात का उदाहरण हैं कि हम भरोसेमंद विकल्प तैयार करने की क्षमता रखते हैं। हमारा सहयोग डिजिटल, सूचना, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और नवाचार जैसे कई क्षेत्रों तक फैला हुआ है। भारत का दृष्टिकोण हमेशा यह रहा है कि ब्रिक्स को लोगों के ज्यादा करीब और उपयोगी बनाया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि हम ब्रिक्स को 'बिल्डिंग रेजिलिएंस एंड इनोवेशन फॉर कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' यानी मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण के रूप में देखते हैं, जिसमें 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर खास ध्यान है।
एस. जयशंकर ने कहा कि इसी सोच के तहत हमारी चार प्राथमिकताएं: मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता साझेदारी और भागीदारी के लिए एक व्यावहारिक ढांचा देती हैं। मजबूती: हम सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, बाजारों में विविधता लाने, शुरुआती चेतावनी प्रणाली सुधारने और जलवायु के अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर काम कर रहे हैं। सामाजिक कल्याण के लिए डिजिटल एकीकरण जैसी पहल लोगों की भलाई पर हमारे मजबूत फोकस को दिखाती है। नवाचार: ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, साइंट्स एंड रिसर्च रिपॉजिटरी और यूथ स्टार्टअप प्लेटफॉर्म जैसी पहल नवाचार को बढ़ावा देने और नए अवसर पैदा करने का काम कर रही हैं। सहयोग: ब्रिक्स एमएसएमई कनेक्ट पोर्टल, ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम और कृषि व स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी जैसी पहल जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम देंगी। स्थिरता: हमारा ध्यान जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास के रास्तों पर है।
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया बदल चुकी है। अब ब्रिक्स को भी आगे बढ़ना होगा। इसे सिर्फ चर्चा का मंच नहीं, बल्कि परिणाम देने वाला प्लेटफॉर्म बनना होगा। हमारी अहमियत सिर्फ इरादों से नहीं, बल्कि नतीजों से तय होगी। जितना ज्यादा हम अपने समाजों और उनकी आकांक्षाओं से जुड़ेंगे, उतना ही ब्रिक्स का महत्व बढ़ेगा। भारत अंतरराष्ट्रीय समझ, एकजुटता, खुलेपन, समावेशिता, पूर्ण परामर्श और सहमति के सिद्धांतों के आधार पर ब्रिक्स को मजबूत करने के अपने संकल्प को दोहराता है। ब्रिक्स की असली ताकत इसकी स्वतंत्रता और विविधता है। दुनिया हमें बदलाव और सुधार की ताकत के रूप में देखती है। हम वास्तव में बहुध्रुवीय दुनिया का उदाहरण हैं। आज जब दुनिया जोखिम कम करने और विकल्प बढ़ाने पर ध्यान दे रही है, तब हम ज्यादा विकल्प उपलब्ध कराते हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रति हमारा दृष्टिकोण आपसी सम्मान और सभी देशों की समान संप्रभुता पर आधारित है। यही भावना हमारी बैठक में भी दिखी और अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकों में भी। हमारा यह मिलना ही दुनिया को एक मजबूत संदेश देता है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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