नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर झूठ फैलाने की साजिश की गई है। झूठे बयान वाला व छेड़छाड़ किया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। इस वीडियो के जरिए चीन की सैन्य ताकत, अरुणाचल प्रदेश में उसकी बढ़ती मौजूदगी और भारतीय सेना की तैयारियों को लेकर भ्रामक दावे किए जा रहे हैं।
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नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर झूठ फैलाने की साजिश की गई है। झूठे बयान वाला व छेड़छाड़ किया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। इस वीडियो के जरिए चीन की सैन्य ताकत, अरुणाचल प्रदेश में उसकी बढ़ती मौजूदगी और भारतीय सेना की तैयारियों को लेकर भ्रामक दावे किए जा रहे हैं।
भारतीय सेना ने इस वीडियो को फर्जी बताते हुए लोगों को आगाह किया है कि वे ऐसे भ्रामक प्रचार के झांसे में न आएं। सेना के अनुसार, पाकिस्तान से जुड़े कुछ दुष्प्रचार करने वाले सोशल मीडिया खातों से यह वीडियो प्रसारित किया जा रहा है। इसमें लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर ऐसे बयान दिखाए गए हैं, जिनमें कथित तौर पर दावा किया गया है कि भारत चीन की उन्नत सैन्य तकनीकों और अरुणाचल प्रदेश में उसकी बढ़ती मौजूदगी का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में संघर्ष कर रहा है।
वीडियो में यह भी झूठा दावा किया गया है कि सरकार भारतीय सेना के हितों के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता देती है। इसके अलावा, पुराने सैन्य उपकरणों को सैनिकों के नुकसान और उनमें बढ़ती निराशा से जोड़ने की कोशिश की गई है। इन दावों के जरिए सेना की क्षमता और सरकार के प्रति जवानों के भरोसे पर सवाल खड़े करने का प्रयास किया गया है।
भारतीय सेना के फैक्ट-चेक के मुताबिक, असली वीडियो अक्टूबर 2025 का पुराना वीडियो है। इसके मूल रूप में डिजिटल बदलाव करके लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के नाम पर ऐसे बयान जोड़ दिए गए हैं, जो उन्होंने नहीं दिए। इस तरह पुराने वीडियो को नए और भ्रामक संदर्भ में पेश करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। इस दुष्प्रचार में भारत-चीन सीमा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना और सरकार के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करना है।
सेना ने स्पष्ट किया है कि वीडियो में उनके नाम से प्रसारित कथित बयानों को वास्तविक नहीं माना जाना चाहिए। इस मामले में दुष्प्रचार का तरीका भी महत्वपूर्ण है। पहले से मौजूद पुराने वीडियो को लिया गया, उसमें डिजिटल तरीके से बदलाव किए गए और फिर कथित सैन्य बयानों के रूप में उसे प्रसारित किया गया। इसके बाद भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दों को जोड़कर ऐसा संदेश देने की कोशिश की गई, जिससे लोगों के बीच भ्रम और अविश्वास पैदा हो।
भारतीय सेना ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी संवेदनशील वीडियो को साझा करने से पहले उसके मूल स्रोत और वास्तविक संदर्भ की जांच जरूर करें। केवल किसी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का नाम या चेहरा दिखाई देने से वीडियो में कही गई बातों को सच नहीं मान लेना चाहिए। सेना का यह फैक्ट-चेक मैसेज ऐसे भ्रामक वीडियो से सतर्क रहने की जरूरत पर जोर देता है, जिनमें पुराने दृश्यों और डिजिटल छेड़छाड़ के जरिए झूठे दावों को वास्तविक दिखाने का प्रयास किया जाता है।
--आईएएनएस
जीसीबी/डीकेपी
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