
नई दिल्ली. बारामती एयरपोर्ट पर हुए विमान हादसे, जिसमें महाराष्ट्र के नेता अजित पवार समेत 5 लोगों की जान चली गई थी, के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ा रुख अपनाया है. DGCA ने VIP और VVIP मूवमेंट्स (मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य बड़े नेता) के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइन जारी की है. अब कोई भी नेता या रसूखदार व्यक्ति फ्लाइट क्रू या पायलट पर अपनी मर्जी थोप नहीं सकेगा.
पायलट 'बॉस' नहीं, 'सुरक्षा' के प्रति जवाबदेह
नई गाइडलाइन का सबसे अहम हिस्सा यह है कि अब पायलट और क्रू मेंबर्स पर किसी भी तरह का मानसिक या पेशेवर दबाव नहीं डाला जा सकता.
सीधा संवाद बंद: यदि VVIP को फ्लाइट शेड्यूल में कोई बदलाव करना है, तो वे सीधे पायलट से बात नहीं कर पाएंगे. यह बदलाव केवल ऑपरेटर मैनेजमेंट के जरिए ही संभव होगा.
मौसम का नियम सर्वोपरि: अगर खराब मौसम के कारण पायलट उड़ान भरने या लैंडिंग से मना करता है, तो VVIP को उस फैसले का सम्मान करना होगा.
थकावट से समझौता नहीं: नेताओं के व्यस्त दौरों के चक्कर में पायलटों की नींद और आराम (Fatigue Management) से समझौता नहीं किया जाएगा.
पायलट को मिला 'राइट टू रिजेक्ट'
DGCA ने साफ कर दिया है कि अगर कोई नेता नियमों के विरुद्ध दबाव डालता है, तो पायलट निडर होकर 'ना' कह सकता है. ऐसी स्थिति में सारी जवाबदेही मैनेजमेंट की होगी, न कि पायलट की व्यक्तिगत जिम्मेदारी. 28 जनवरी को हुई बारामती की दुखद घटना ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिसके जवाब में ये ऐतिहासिक बदलाव किए गए हैं.
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