नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। दीपावली का त्योहार आते ही हर तरफ मां लक्ष्मी की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस खास मौके पर भक्त मंदिरों में जाकर मां महालक्ष्मी के दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। देश में मां लक्ष्मी के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन हरियाणा के हिसार जिले में स्थित अग्रोहा धाम की कहानी बेहद खास है।
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नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। दीपावली का त्योहार आते ही हर तरफ मां लक्ष्मी की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस खास मौके पर भक्त मंदिरों में जाकर मां महालक्ष्मी के दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। देश में मां लक्ष्मी के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन हरियाणा के हिसार जिले में स्थित अग्रोहा धाम की कहानी बेहद खास है।
इस जगह का संबंध महाराजा अग्रसेन और अग्रवाल समुदाय के इतिहास से जोड़ा जाता है। प्रचलित मान्यता के अनुसार, मां महालक्ष्मी के आशीर्वाद से राजा अग्रसेन एक नए राज्य की स्थापना करना चाहते थे। इसके लिए राजा अग्रसेन पत्नी रानी माधवी के साथ उपयुक्त स्थान की तलाश में निकल पड़े।
कहा जाता है कि यात्रा के दौरान उन्हें एक जगह बाघ के शावक और भेड़ियों के बच्चे एक साथ खेलते हुए दिखाई दिए। राजा अग्रसेन और रानी माधवी ने इसे शुभ संकेत माना। उन्हें लगा कि यह वीरों की भूमि है और यहां एक समृद्ध राज्य बसाया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने इसी स्थान पर अग्रोहा नगरी की स्थापना की। धीरे-धीरे यह नगर व्यापार और कृषि के क्षेत्र में काफी समृद्ध हो गया।
समय के साथ अग्रोहा का ऐतिहासिक महत्व कम होने लगा, लेकिन इस स्थान को फिर से पहचान दिलाने के प्रयास जारी रहे। साल 1907 में ब्रह्मानंद ब्रह्मचारी नाम के एक तपस्वी यहां पहुंचे। उन्होंने अग्रवाल समुदाय के लोगों को इस ऐतिहासिक स्थल के विकास के लिए प्रेरित किया। इसके बाद 1908 में अग्रवाल दरबार नाम से एक संगठन बनाया गया। यहां गौशाला, शिव मंदिर और 18 सती तीर्थों की स्थापना भी की गई।
आधुनिक अग्रोहा धाम के निर्माण का फैसला साल 1976 में अखिल भारतीय अग्रवाल प्रतिनिधियों के सम्मेलन में लिया गया। इसके लिए अग्रोहा विकास ट्रस्ट बनाया गया। मंदिर का निर्माण कार्य 1976 में शुरू हुआ और मुख्य मंदिर 1984 में बनकर तैयार हुआ। इसके बाद परिसर में दूसरी सुविधाओं और दर्शनीय स्थलों का विकास किया गया।
अग्रोहा धाम की सबसे खास बात इसका मंदिर परिसर है, जो तीन प्रमुख हिस्सों में बंटा हुआ है। मंदिर के बीच वाले हिस्से में मां महालक्ष्मी विराजमान हैं। पश्चिमी हिस्से में मां सरस्वती और पूर्वी हिस्से में महाराजा अग्रसेन को समर्पित मंदिर है। यहां आने वाले श्रद्धालु तीनों के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।
मां महालक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। वहीं मां सरस्वती ज्ञान और बुद्धि की देवी हैं। ऐसे में एक ही परिसर में दोनों देवियों के दर्शन करना भक्तों के लिए विशेष अनुभव होता है।
अग्रोहा धाम में सिर्फ मंदिर ही नहीं, बल्कि कई ऐसी जगहें हैं जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान खींचती हैं। मंदिर परिसर के पीछे शक्ति सरोवर नाम का एक बड़ा तालाब है। खास बात यह है कि साल 1988 में इस सरोवर को देश की 41 नदियों के जल से भरा गया था। इसके उत्तर-पश्चिमी छोर पर समुद्र मंथन की सुंदर झांकी भी बनाई गई है।
इसके अलावा परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की लीला, गजमुक्तेश्वर और कई धार्मिक प्रसंगों की झांकियां देखने को मिलती हैं। यहां जमीन से करीब 15 फीट नीचे मां वैष्णो देवी की गुफा बनाई गई है। श्रद्धालु यहां तिरुपति बालाजी, भैरवनाथ, बाबा अमरनाथ और हनुमान के भी दर्शन कर सकते हैं। परिसर में हनुमान जी की करीब 90 फीट ऊंची प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र है।
अग्रोहा धाम में हर साल शरद पूर्णिमा के अवसर पर महाकुंभ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां महालक्ष्मी और महाराजा अग्रसेन के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। त्योहार के दौरान पूरा परिसर भक्तिमय माहौल से भर जाता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/वीसी
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