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आईईए प्रमुख को होर्मुज के भविष्य की फिक्र, बोले- कई देश अपनी ऊर्जा नीतियों की कर रहे समीक्षा


अंकारा, 18 जून (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फतिह बिरोल ने यूएस-ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते का स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने ऊर्जा नीतियों की समीक्षा पर जोर दिया। ईरान के व्यवहार पर संदेह जताते हुए उन्होंने कहा कि हो सकता है उसने जो अब किया वह भविष्य में भी करे, इसलिए विभिन्न देशों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

अंकारा, 18 जून (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फतिह बिरोल ने यूएस-ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते का स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने ऊर्जा नीतियों की समीक्षा पर जोर दिया। ईरान के व्यवहार पर संदेह जताते हुए उन्होंने कहा कि हो सकता है उसने जो अब किया वह भविष्य में भी करे, इसलिए विभिन्न देशों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बिरोल ने कहा, "ईरान संघर्ष को समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते का स्वागत किया जाना चाहिए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना किसी शर्त के दोबारा खोला जाना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि कई देश अपनी ऊर्जा नीतियों की समीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि यह स्पष्ट है कि यह समुद्री मार्ग भविष्य में फिर से बंद किया जा सकता है विशेषकर क्योंकि संघर्ष के दौरान ईरान ने इसे बंद कर दिया था।

इस्तांबुल में एक कार्यक्रम के दौरान बिरोल ने कहा कि आईईए कई देशों के साथ नई रणनीतियों पर चर्चा करेगा, क्योंकि इस संकट ने वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को बदल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा बाजारों में “भरोसा” बेहद जरूरी है, जहां शांति समझौते के बाद तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मार्ग को “बिना शर्त” खोला जाना चाहिए ताकि सभी पक्षों को यह विश्वास हो कि यह सुरक्षित है।

बिरोल ने कहा कि “अब सभी देश जानते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार बंद हो चुका है और इसे फिर से बंद किया जा सकता है,” इसलिए आगे की स्थिति को लेकर सतर्कता बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि यह संकट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर देशों की सोच को पूरी तरह बदल चुका है, और अब इसे पहले की तरह सामान्य स्थिति में नहीं देखा जा सकता।

बिरोल ने आगे कहा कि एजेंसी भी विभिन्न सरकारों के साथ नई ऊर्जा सुरक्षा रणनीतियों पर चर्चा करेगी।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का कहना है कि ईरान युद्ध (28 फरवरी को शुरू) के बाद हर दिन करीब 1.4 करोड़ (14 मिलियन) बैरल तेल की सप्लाई रुक गई या बाधित हो गई। इसका मुख्य कारण संघर्ष और तनाव की वजह से तेल भेजने के रास्ते, खासकर समुद्री मार्ग बाधित हो गए और उत्पादन भी कम हो गया। दुनिया को मिलने वाला बहुत बड़ा तेल सप्लाई हिस्सा कुछ समय के लिए रुक गया, जिससे पूरे वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ा।

--आईएएनएस

केआर/

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