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अकाली दल ने पेपर लीक रोकने वाले विधेयक का किया स्वागत, राज्यों को परीक्षा कराने का अधिकार देने की मांग


चंडीगढ़, 26 जुलाई (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल ने प्रस्तावित पब्लिक परीक्षा (अनुचित साधनों पर रोक) संशोधन विधेयक, 2026 का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार से राज्यों को भी अपनी भर्तियों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए परीक्षाएं आयोजित करने का अधिकार देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मजबूत राष्ट्रीय मानकों के साथ परीक्षाओं का विकेंद्रीकरण ही पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगा सकता है।

चंडीगढ़, 26 जुलाई (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल ने प्रस्तावित पब्लिक परीक्षा (अनुचित साधनों पर रोक) संशोधन विधेयक, 2026 का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार से राज्यों को भी अपनी भर्तियों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए परीक्षाएं आयोजित करने का अधिकार देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मजबूत राष्ट्रीय मानकों के साथ परीक्षाओं का विकेंद्रीकरण ही पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगा सकता है।

अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान आवश्यक है, लेकिन केवल दंडात्मक कार्रवाई से सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए रोकथाम संबंधी उपायों पर समान रूप से ध्यान देना होगा।

डॉ. चीमा ने कहा कि सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप केंद्र सरकार को राज्यों को अपनी भर्ती परीक्षाएं और संस्थागत परीक्षाएं आयोजित करने के लिए सशक्त बनाना चाहिए। साथ ही पूरे देश में समान राष्ट्रीय सुरक्षा मानक और मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) लागू की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मजबूत राष्ट्रीय एसओपी के साथ विकेंद्रीकरण से प्रणालीगत जोखिम कम होगा, जवाबदेही बढ़ेगी और परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत होगा। इससे लाखों ईमानदार छात्रों की मेहनत और भविष्य की भी बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

अकाली नेता ने कहा कि कानून में केवल सख्त सजा ही नहीं, बल्कि मजबूत एसओपी, सुरक्षित तकनीक, एंड-टू-एंड जवाबदेही, नियमित सुरक्षा ऑडिट और फुलप्रूफ परीक्षा प्रोटोकॉल जैसे निवारक उपायों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि डेटा और प्रश्नपत्रों के लीक होने की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

डॉ. चीमा ने कहा कि भारत का विशाल भौगोलिक क्षेत्र, भाषाई विविधता, अलग-अलग राज्यों में बुनियादी ढांचे और तकनीकी संसाधनों में अंतर तथा हजारों परीक्षा केंद्रों तक गोपनीय प्रश्नपत्र पहुंचाने जैसी चुनौतियां अत्यधिक केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली को स्वाभाविक रूप से अधिक संवेदनशील बनाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के साथ राज्यों को अधिक जिम्मेदारी देना परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी

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