
वॉशिंगटन: अमेरिकी सेना ने नार्को-टेररिस्ट नेटवर्क के खिलाफ अपने अभियान को तेज करते हुए पूर्वी प्रशांत महासागर में दो संदिग्ध नावों को निशाना बनाया है। ड्रग तस्करी के संदेह में की गई इस कार्रवाई में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति चमत्कारिक रूप से बच गया। सितंबर माह से शुरू हुए इस आक्रामक सैन्य अभियान में अब तक कम से कम 168 लोग मारे जा चुके हैं।
बिना ठोस सबूत सैन्य कार्रवाई? अमेरिकी दक्षिणी कमान (US Southern Command) के अनुसार, शनिवार को उन समुद्री मार्गों पर हमले किए गए जो कथित तौर पर ड्रग तस्करी के लिए उपयोग होते हैं। हालांकि, सेना ने अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि नष्ट की गई नावों में वास्तव में मादक पदार्थ मौजूद थे या नहीं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में छोटी नावों को भीषण विस्फोट के साथ समुद्र में डूबते हुए देखा गया है। फिलहाल अमेरिकी कोस्ट गार्ड जीवित बचे व्यक्ति की स्थिति पर नजर रख रहा है।
ट्रंप प्रशासन की 'सशस्त्र संघर्ष' नीति: यह कार्रवाई पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस रुख का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने लैटिन अमेरिकी कार्टेल्स के खिलाफ 'सशस्त्र संघर्ष' का आह्वान किया था। प्रशासन का दावा है कि अमेरिका में फेंटानिल (Fentanyl) और अन्य ड्रग्स की आपूर्ति रोकने के लिए यह कदम अनिवार्य है। हालांकि, विशेषज्ञों ने इस नीति की आलोचना करते हुए कहा है कि अधिकांश ड्रग्स जमीन के रास्ते तस्करी होती है और समुद्र में इस तरह की घातक सैन्य कार्रवाई की वैधता पर सवाल खड़े होते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और बढ़ता तनाव: एक तरफ प्रशांत महासागर में कार्रवाई जारी है, तो दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की पूर्ण नाकेबंदी की घोषणा कर दी है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) अब ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले हर जहाज पर नजर रखेगी। चूंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए इस कदम ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है। आने वाले समय में यह समुद्री तनाव एक बड़े वैश्विक संघर्ष का रूप ले सकता है।
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