नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। अमेरिका में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के खिलाफ लगे धोखाधड़ी के आरोप जल्द ही खत्म हो सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इस मामले को सुलझाने और केस को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस तरह से पिछले एक साल से जारी कानूनी विवाद खत्म हो सकता है।
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नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। अमेरिका में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के खिलाफ लगे धोखाधड़ी के आरोप जल्द ही खत्म हो सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इस मामले को सुलझाने और केस को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस तरह से पिछले एक साल से जारी कानूनी विवाद खत्म हो सकता है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी लीगल डिपार्टमेंट (न्याय विभाग) इसी हफ्ते अदाणी के खिलाफ लगे आरोपों को वापस लिए जाने की घोषणा कर सकता है। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) भी गौतम अदाणी और अन्य के खिलाफ नागरिक धोखाधड़ी (सिविल फ्रॉड) के मामले को निपटाने की तैयारी कर रहा है। यह मामला नवंबर 2024 में शुरू किया गया था।
हालांकि, अदाणी ग्रुप शुरुआत से इन आरोपों का खंडन करता रहा है। इन मामलों के अंत से अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार अदाणी ग्रुप के लिए फिर से खुल जाएंगे, जिससे ग्रुप को अपनी योजनाओं को विस्तार देने के लिए आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि अमेरिकी लीगल डिपार्टमेंट देश के बाहर घटित घटनाक्रम से संबंधित मामले में आरोपों को खत्म करने की प्रक्रिया को अपना सकता है। लेकिन, एसईसी के प्रस्ताव में केस को निपटाने के लिए जुर्माने के प्रावधान को शामिल किया जा सकता है।
हालांकि अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने इस मामले में कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है। वहीं, एसईसी और अदाणी ग्रुप के प्रवक्ता ने भी इस मामले में कोई ऑफिशियल बयान नहीं दिया है।
बता दें कि अटॉर्नी कार्यालय की तरफ से अदाणी और उनके सहयोगियों पर इंडिया में सौर ऊर्जा कॉन्ट्रैक्ट लेने के लिए 250 मिलियन डॉलर की रिश्वतखोरी का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि अमेरिकी निवेशकों से इस बात को छिपाया गया था। हालांकि, अदाणी ग्रुप ने इस बात को सिरे से खारिज किया है। वहीं, इस मामले में अदाणी और उनके भतीजे सागर समेत कोई भी आरोपी अमेरिकी कोर्ट में पेश नहीं हुआ है।
इस क्रम में अदाणी ग्रुप ने दस्तावेजों के माध्यम से एसईसी से फ्रॉड केस खारिज करने की मांग की थी, क्योंकि अमेरिकी रेग्युलेटर के पास आवश्यक क्षेत्राधिकार की कमी है।
--आईएएनएस
एमएस/एबीएम
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