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अनिल कुंबले करियर की शुरुआत में तेज गेंदबाज थे, खुद बताई स्पिनर बनने की कहानी


नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और टेस्ट क्रिकेट के महानतम गेंदबाजों में शुमार अनिल कुंबले ने अपने करियर के उस दौर को याद किया है जिसने उन्हें एक तेज गेंदबाज से स्पिनर बनने पर मजबूर किया था। हालांकि, स्पिनर बनना कुंबले के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ, और उन्होंने अपने करियर की समाप्ति एक महानतम गेंदबाज के तौर पर की।

नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और टेस्ट क्रिकेट के महानतम गेंदबाजों में शुमार अनिल कुंबले ने अपने करियर के उस दौर को याद किया है जिसने उन्हें एक तेज गेंदबाज से स्पिनर बनने पर मजबूर किया था। हालांकि, स्पिनर बनना कुंबले के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ, और उन्होंने अपने करियर की समाप्ति एक महानतम गेंदबाज के तौर पर की।

अनिल कुंबले ने एक कार्यक्रम में बताया कि स्कूल और क्लब क्रिकेट खेलते समय वह मुख्य रूप से एक तेज गेंदबाज थे। उस समय एक सीनियर ने उनके एक्शन पर चिंता जताई थी।

उन्होंने कहा, "मेरे क्लब के एक सीनियर खिलाड़ी ने मेरे कोच से मुझे गेंदबाजी करने से रोकने के लिए कहा क्योंकि उन्हें लगा कि मैं अपनी कोहनी मोड़ रहा हूं। सच कहूं तो मुझे पता भी नहीं चला कि मैं अपनी कोहनी मोड़ रहा हूं। मैं अपने तरीके से गेंदबाजी कर रहा था। मैं उस समय लगभग 13-14 साल का था और शायद उतना मजबूत नहीं था। मुझ पर चक (थ्रो) गेंदबाजी करने का आरोप था।"

कुंबले ने कहा कि कर्नाटक अंडर-15 के ट्रायल से पहले मैं दूसरे विकल्प की तलाश में था। मैंने इस विषय में अपने भाई से सलाह ली। उन्होंने बेहतर अवसर के लिए स्पिन गेंदबाजी का रुख करने की सलाह दी। मुझे तब लेग स्पिन के बारे में ज्यादा पता नहीं था। मैंने बी. एस. चंद्रशेखर का नाम सुना था, लेकिन टेलीविजन आम नहीं था और मैंने उन्हें मैचों में गेंदबाजी करते नहीं देखा था।

दिग्गज गेंदबाज ने कहा कि उन्होंने लेग स्पिन डिसिप्लिन में बहुत कम तकनीकी समझ और बिना किसी कोचिंग के एंट्री की। ग्रिप का इस्तेमाल करके अपनी लेग स्पिन को बेहतर किया।

उन्होंने कहा, "मैंने पहली बार असली क्रिकेट गेंद उठाई थी, तो ऑफ-स्पिन ग्रिप से गेंदबाजी की थी। इसलिए, जब मुझे लेग-स्पिन गेंदबाजी करने के लिए कहा गया, तो मैंने बस अपनी ऑफ-स्पिन ग्रिप का इस्तेमाल किया और गेंद को टर्न करने की कोशिश की और लेग-स्पिन गेंदबाजी की। मेरे बगल में कोई कोच खड़ा नहीं था जो मुझे ठीक से बता रहा हो कि इसे कैसे पकड़ना है या कैसे छोड़ना है। एक या दो महीने बाद, कर्नाटक अंडर-15 ट्रायल्स में, मेरा चयन हो गया। मैं कर्नाटक अंडर 15 के लिए खेलने गया। उस चयन के बाद एक शानदार सफर की शुरुआत हुई।"

अनिल कुंबले ने 20 साल की उम्र में 1990 में भारतीय टीम के लिए टेस्ट और वनडे में डेब्यू किया। 2008 तक चले करियर में कुंबले ने भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी भी की। कुंबले ने 132 टेस्ट मैचों में 619 और 271 वनडे में 337 विकेट लिए। वह भारत की तरफ से सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में कुंबले मुरलीधरन, शेन वॉर्न और जेम्स एंडरसन के बाद चौथे नंबर पर हैं। अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में भी कुंबले चौथे सफलतम गेंदबाज हैं।

--आईएएनएस

पीएके

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