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अंशुमन गायकवाड़ : विरासत में मिला क्रिकेट का खेल, मैदान पर बाल-बाल बची थी जान, डटकर किया खतरनाक तेज गेंदबाजों का सामना


नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के पूर्व बल्लेबाज अंशुमन गायकवाड़ की गिनती भारत के सबसे साहसी बल्लेबाजों में की जाती है। अंशुमन ने 1970-80 के दौर में वेस्टइंडीज के उन खतरनाक तेज गेंदबाजों का डटकर सामना किया, जिनके खिलाफ बल्लेबाज विकेट से ज्यादा अपना शरीर बचाने की कोशिश करते थे।

नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के पूर्व बल्लेबाज अंशुमन गायकवाड़ की गिनती भारत के सबसे साहसी बल्लेबाजों में की जाती है। अंशुमन ने 1970-80 के दौर में वेस्टइंडीज के उन खतरनाक तेज गेंदबाजों का डटकर सामना किया, जिनके खिलाफ बल्लेबाज विकेट से ज्यादा अपना शरीर बचाने की कोशिश करते थे।

अंशुमन गायकवाड़ का जन्म 23 सितंबर 1952 को मुंबई में हुआ था। अंशुमन को क्रिकेट का खेल विरासत में मिला। उनके पिता दत्ताजीराव गायकवाड़ भी भारत की ओर से क्रिकेट खेल चुके थे और उन्होंने कप्तान की जिम्मेदारी भी निभाई थी। 1952 से 1961 के बीच में उनके पिता ने भारत के लिए 11 टेस्ट मैच खेले थे। यही वजह रही कि अंशुमन को इस खेल की बारीकियां सीखने में ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बूते अंशुमन को साल 1975 में भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से डेब्यू करने का मौका मिला।

वेस्टइंडीज के खिलाफ ईडन गार्डन्स के मैदान पर करियर के पहले टेस्ट मैच में अंशुमन ने दोनों पारियों को मिलाकर 40 रन बनाए। मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज के तौर पर टीम इंडिया में आए अंशुमन ने जल्द ही सलामी बल्लेबाज की जिम्मेदारी संभाल ली। वह सुनील गावस्कर के साथ पारी का आगाज करने लगे। गावस्कर एक छोर से रन बनाते थे, तो अंशुमन क्रीज पर खूंटा गाड़कर खड़े रहते थे।

साल 1976 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज का तीसरा टेस्ट मैच जीतने के बाद भारतीय टीम चौथे टेस्ट खेलने मैदान में उतरी। क्लाइव लॉयड की कप्तानी वाली वेस्टइंडीज का उस दौर में दबदबा हुआ करता था। कैरेबियाई टीम हार को हजम नहीं कर पाती थी। यही कारण था कि चौथे टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने भारतीय टीम के बल्लेबाजों के शरीर को निशाना बनाने की ठानी थी।

अंशुमन गायकवाड़ और सुनील गावस्कर पहले विकेट के लिए 136 रन जोड़ चुके थे। विकेट चटकाने में नाकाम रहने के कारण वेस्टइंडीज के गेंदबाजों का गुस्सा और बढ़ गया था। इसके बाद माइकल होल्डिंग की एक रफ्तार भरी गेंद उछाल लेती हुई सीधा अंशुमन के कान पर आकर लगी, जिसके बाद उनका मुंह लहूलुहान हो गया। अंशुमन को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और उन्हें दो दिन तक आईसीयू में भी रहना पड़ा। हर किसी को लगा कि अंशुमन अब शायद ही कभी मैदान पर वापसी कर पाएंगे।

हालांकि, सात महीने बाद वह फिर से मैदान पर लौटे और उन्होंने उसी बहादुरी के साथ वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों का ना सिर्फ सामना किया, बल्कि भारत में खेली गई टेस्ट सीरीज में शतक भी लगाया। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट में दोहरा शतक भी लगाया। अंशुमन ने भारत के लिए खेले 40 टेस्ट मैचों में 1985 रन बनाए। वहीं, 15 वनडे मैचों में उन्होंने 269 रन बनाए। बतौर खिलाड़ी क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अंशुमन गायकवाड़ ने सिलेक्टर और फिर भारतीय कोच की जिम्मेदारी भी संभाली। 31 जुलाई 2024 को अंशुमन गायकवाड़ का 71 साल की उम्र में निधन हो गया। वह कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे।

--आईएएनएस

एसएम/पीएम

Date & Time : 2026-09-22 17:15:10

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