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आपदा को लेकर तिब्बती पीएम पेनपा त्सेरिंग बोले, 'चीन, नेपाल पर डाल रहा दोष'


धर्मशाला, 27 अगस्त (आईएएनएस)। नेपाल में आई भयानक आपदा में जान गंवाने वालों के लिए दलाई लामा मंदिर में प्रार्थना की गई। तिब्बत के प्रधानमंत्री पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि कई तिब्बती परिवार प्रभावित हुए हैं और कुछ लोग लापता हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि तिब्बती सरकार हर मुमकिन मदद देगी।

धर्मशाला, 27 अगस्त (आईएएनएस)। नेपाल में आई भयानक आपदा में जान गंवाने वालों के लिए दलाई लामा मंदिर में प्रार्थना की गई। तिब्बत के प्रधानमंत्री पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि कई तिब्बती परिवार प्रभावित हुए हैं और कुछ लोग लापता हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि तिब्बती सरकार हर मुमकिन मदद देगी।

तिब्बत की देश निकाला सरकार के प्रधानमंत्री पेनपा त्सेरिंग ने कहा, "रासुवागढ़ी में हमारे पास पांच छोटी तिब्बती बस्तियां हैं। उनमें से तीन ऊपरी इलाकों में हैं, इसलिए उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन रासुवागढ़ी, तिब्बती बस्ती में लगभग 11 तिब्बती परिवार हैं। वे सभी खत्म हो गए हैं। उनमें से सिर्फ दो ही वहां रहते हैं, दो बुज़ुर्ग आदमी। हमें अभी उनके बारे में नहीं पता।"

पेनपा त्सेरिंग ने कहा, "अब, तिब्बत के अंदर, भारतीय खबरों के अनुसार, ऐसा लगता है कि इसकी शुरुआत तिब्बत के 20 किलोमीटर अंदर हुई है, जबकि चीनी सरकार यह कहने की कोशिश कर रही है कि यह नेपाल के अंदर है।"

तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने नेपाल के रसुवा इलाके और तिब्बत के कीरोंग में आई विनाशकारी बाढ़ से हुई जनहानि पर दुख जताया है। गुरुवार को उन्होंने एक बयान जारी कर अपनी भावनाएं व्यक्त की।

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने एक बयान में कहा, "नेपाल के रसुवा क्षेत्र और तिब्बत के कीरोंग में विनाशकारी बाढ़ के बारे में जानकर मुझे दुख हुआ है। इस आपदा की वजह से कई लोगों ने जान गंवाई और भारी संरचनात्मक क्षति हुई। मैं उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना करता हूं जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, और शोक संतप्त और इस त्रासदी पीड़ित सभी लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति और हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं।"

उन्होंने कहा कि चूंकि इस क्षेत्र ने पहले भी आपदाएं देखी हैं, ये निश्चित रूप से एक गहरे अंतर्निहित कारण के लक्षण हैं। वो चाहे जलवायु परिवर्तन हो या अन्य कारक।

बुजुर्ग बौद्ध भिक्षु ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि जहां भी संभव हो, उचित अनुवर्ती (फॉलोअप) उपाय किए जाएंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी आपदाएं दोबारा न हों।"

तिब्बती क्षेत्र से होते हुए बाढ़ सीमा पार भोटेकोशी नदी पहुंच गई, और नेपाल में विनाश का निशान छोड़ गई।

--आईएएनएस

केके/डीएससी

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