Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

अफ्रीका में जारी इबोला प्रकोप से निपटने में भारत निभाएगा अहम भूमिका, तेज कर रहा वैक्सीन उत्पादन की प्रक्रिया: रिपोर्ट


नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य अफ्रीका में जारी इबोला वायरस के प्रकोप से निपटने के वैश्विक प्रयासों में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है, क्योंकि भारत का सीरम इंस्टीट्यूट (एसआईआई) वायरस के बंडिबुग्यो स्ट्रेन को निशाना बनाने वाली वैक्सीन के विकास और उत्पादन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य अफ्रीका में जारी इबोला वायरस के प्रकोप से निपटने के वैश्विक प्रयासों में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है, क्योंकि भारत का सीरम इंस्टीट्यूट (एसआईआई) वायरस के बंडिबुग्यो स्ट्रेन को निशाना बनाने वाली वैक्सीन के विकास और उत्पादन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

मॉडर्न डिप्लोमेसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस (सीईपीआई) के सहयोग से की जा रही है। इस परियोजना को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) का भी समर्थन प्राप्त है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि चाडऑक्स1 बीडीबीवी नाम की यह वैक्सीन बंडिबुग्यो इबोलावायरस से सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार की जा रही है। यह वायरस का अपेक्षाकृत दुर्लभ स्ट्रेन है, जो वर्तमान में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और युगांडा के कुछ हिस्सों में फैल रहे प्रकोप से जुड़ा हुआ है।

इबोला के ज्यादा चर्चित जैरे स्ट्रेन के विपरीत, बंडिबुग्यो वैरिएंट के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि इस वैक्सीन का विकास बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह वैक्सीन उसी वायरल वेक्टर तकनीक पर आधारित है जिसका इस्तेमाल ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड-19 वैक्सीन में किया गया था। इससे क्लीनिकल परीक्षण के लिए आवश्यक डोज तैयार होने के बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां इबोला के मौजूदा प्रकोप को नियंत्रित करने और इसके और अधिक फैलाव को रोकने के प्रयासों में जुटी हैं। इसी के तहत डब्ल्यूएचओ ने इस वैक्सीन उम्मीदवार के मूल्यांकन की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया है।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस साल की शुरुआत से अब तक कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में इबोला के 1,500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 650 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने हाल ही में कहा था कि बंडिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी वैक्सीन मौजूदा महामारी को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है और भविष्य में होने वाले प्रकोपों के लिए तैयारियों को भी मजबूत बनाएगी।

अफ्रीका सीडीसी के महानिदेशक जीन कासेया ने भी पुष्टि की है कि इस वैक्सीन का निर्माण भारत के सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा किया जाएगा।

इस बीच, भारत में इबोला का कोई सक्रिय मामला दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों और हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और जरूरत पड़ने पर आइसोलेशन की व्यवस्था भी की गई है।

विशेषज्ञों ने इबोला के प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य चिंता के रूप में वर्णित किया है, और सरकारें और वैक्सीन निर्माता अपनी तैयारियों को मजबूत करने और वैक्सीन विकास की प्रक्रिया में तेजी लाने की होड़ में लगे हुए हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

Share:

Leave A Reviews

Related News