नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमेटी (आरबीआई-एमपीसी) 3-5 जून के बीच होने वाली अपनी तीन दिवसीय बैठक में रेपो रेट को यथावत रख सकती है। इसकी वजह वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और इसका महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर असर होना है।
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नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमेटी (आरबीआई-एमपीसी) 3-5 जून के बीच होने वाली अपनी तीन दिवसीय बैठक में रेपो रेट को यथावत रख सकती है। इसकी वजह वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और इसका महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर असर होना है।
बाजार के जानकारों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जून एमपीसी में केंद्रीय बैंक अपना सतर्क रुख बनाए रखेगा और पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों और कमोडिटी की कीमतों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और वित्तीय बाजारों पर उनके प्रभावों पर बारीकी से नजर रखेगा, उसके बाद ही कोई नीतिगत कदम उठाएगा।
तीन दिवसीय एमपीसी बैठक के फैसले का ऐलान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को करेंगे। समिति ने अप्रैल में हुई अपनी पिछली बैठक में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया था, जिसका कारण भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न अनिश्चितताएं और मुद्रास्फीति एवं विकास संभावनाओं पर उनके संभावित प्रभाव थे।
हालांकि, ब्याज दरों में यथास्थिति बने रहने की संभावना सबसे अधिक है, लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक अपने व्यापक आर्थिक अनुमानों में संशोधन कर सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला में लगातार व्यवधान और बाहरी कारकों के कारण रुपए पर दबाव, आरबीआई को चालू वित्त वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को बढ़ाने और जीडीपी वृद्धि अनुमानों में कटौती करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
एसबीआई रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अस्थिर वैश्विक परिदृश्य के बीच केंद्रीय बैंक मौजूदा नीतिगत दर को बनाए रखेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, मुद्रास्फीति के रुझान बताते हैं कि उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति अगले तीन तिमाहियों तक 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है, हालांकि चालू तिमाही में मुद्रास्फीति 4 से 4.1 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है और वित्त वर्ष 2026 के लिए समग्र आर्थिक वृद्धि 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, इसमें चेतावनी दी गई है कि लंबे समय तक चलने वाली भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं दृष्टिकोण को बदल सकती हैं और नए आंकड़े उपलब्ध होने पर विकास पूर्वानुमानों में संशोधन की आवश्यकता हो सकती है।
वित्त वर्ष 2027 के लिए, एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहेगी। साथ ही रिपोर्ट में कहा कि वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिवेश में होने वाले घटनाक्रमों के आधार पर यह पूर्वानुमान बदल सकता है।
रिपोर्ट में तर्क दिया गया कि आरबीआई को फिलहाल ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखते हुए आंकड़ों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाना जारी रखना चाहिए। इसमें कहा गया है कि यदि मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक के पास वैकल्पिक नीतिगत उपाय उपलब्ध हैं, जिनमें ऑपरेशन ट्विस्ट जैसे उपाय शामिल हैं, जो बेंचमार्क ब्याज दरों में बदलाव किए बिना बाजार की स्थितियों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
--आईएएनएस
एबीएस
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