
सतना। मध्य प्रदेश की सतना सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था और दावों की पोल खोलने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। गुरुवार शाम सोशल मीडिया पर एक ऐसा ऑडियो वायरल हुआ, जिसने जेल प्रशासन के भीतर चल रहे काले कारनामों को पूरी तरह उजागर कर दिया है। इस लीक हुए ऑडियो में जेल के भीतर बंद कैदियों तक गांजा, शराब की बोतल और मोटी नकदी पहुंचाने की बकायदा डील की जा रही है। मामला सामने आते ही जेल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल अधीक्षक लीना कोष्टा ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया है। उन्होंने भ्रष्टाचार, गंभीर लापरवाही और जेल मैन्युअल के उल्लंघन के आरोप में मुख्य प्रहरी राजेंद्र चौधरी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। इसके साथ ही आरोपी प्रहरी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
यह वायरल ऑडियो किस तारीख का है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। लेकिन मुख्य प्रहरी को बेनकाब करने वाले शख्स ने बेहद शातिर और पूरी प्लानिंग के साथ जाल बिछाया था। इस भंडाफोड़ को अंजाम देने के लिए शख्स ने एक साथ दो मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया।
शख्स ने पहले मोबाइल से मुख्य प्रहरी राजेंद्र चौधरी के निजी नंबर (+++++76507) पर कॉल लगाया। कॉल कनेक्ट होते ही उसने चालाकी दिखाते हुए पास में रखे दूसरे मोबाइल का वॉयस रिकॉर्डर ऑन कर दिया और पूरी बातचीत को लाइव रिकॉर्ड कर लिया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि भविष्य में प्रहरी के पास अपनी आवाज से मुकरने का कोई रास्ता न बचे।
वायरल ऑडियो में एक अज्ञात युवक और मुख्य प्रहरी राजेंद्र चौधरी के बीच बेखौफ अंदाज में बातचीत सुनी जा सकती है। युवक जेल के अंदर 25 ग्राम गांजा, एक शराब की बोतल और 5 हजार रुपए कैश पहुंचाने की बात कहता है। हैरान करने वाली बात यह है कि प्रहरी इस अवैध सामान को अंदर ले जाने से मना नहीं करता, बल्कि खाना खाने के बाद इसे रिसीव करने का समय तय करता है।
ऑडियो में हुई बातचीत का मुख्य अंश इस प्रकार है:
युवक: भैया सामान पहुंचाना है। जेल प्रहरी: क्या है? युवक: 25 ग्राम गांजा है, आपके पीने के लिए शराब की बोतल है और 5 हजार रुपए कैश है। कितनी देर में आऊं? जेल प्रहरी: अभी मैं खाना खा रहा हूं। साढ़े दस या दस बजे तक पहुंचूंगा (तब आना)।
इस ऑडियो के सार्वजनिक होने के बाद सतना सेंट्रल जेल की सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरों और तीन स्तरीय चेकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। आम जनता और स्थानीय प्रशासन के बीच यह चर्चा तेज है कि जब जेल के रक्षक ही खुद भक्षक बनकर पैसों के लालच में गांजा और शराब जैसी प्रतिबंधित चीजें अंदर भिजवाएंगे, तो अपराधियों में कानून का खौफ कैसे रहेगा?
जेल के भीतर इस तरह के नेटवर्क का चलना किसी बड़ी वारदात को आमंत्रण देने जैसा है। जेल अधीक्षक लीना कोष्टा ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम की एक विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर भोपाल स्थित वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों और जेल मुख्यालय को भेज दी गई है, ताकि इस रैकेट में शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
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