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बागी सांसदों पर संजय राउत का तंज, कहा-वे खुद को बेचने के लिए बाजार में खड़े थे


मुंबई, 19 जून (आईएएनएस)। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के ऐतिहासिक मौके पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। चार साल के भीतर पार्टी में दूसरी बार बड़ी फूट तब पड़ी जब छह लोकसभा सांसदों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने का फैसला किया। इसके एक दिन बाद शुक्रवार को शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने बागी सांसदों पर तीखा हमला किया। उन्होंने दावा किया कि कैबिनेट में पद पाने को लेकर हुए विवाद के बाद उन्हें शांत करने के लिए देर रात पैसों का लेन-देन (फाइनेंशियल सेटलमेंट) करना पड़ा था।

मुंबई, 19 जून (आईएएनएस)। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के ऐतिहासिक मौके पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। चार साल के भीतर पार्टी में दूसरी बार बड़ी फूट तब पड़ी जब छह लोकसभा सांसदों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने का फैसला किया। इसके एक दिन बाद शुक्रवार को शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने बागी सांसदों पर तीखा हमला किया। उन्होंने दावा किया कि कैबिनेट में पद पाने को लेकर हुए विवाद के बाद उन्हें शांत करने के लिए देर रात पैसों का लेन-देन (फाइनेंशियल सेटलमेंट) करना पड़ा था।

उन्होंने कहा, "वे खुद को बेचने के लिए बाज़ार में खड़े थे।" राउत ने कहा कि बागी सांसदों ने बस अपनी वफादारी की बोली लगवाई है।

उन्होंने कहा, "मैं इसे बंटवारा नहीं मानता। कोई व्यक्ति तब पार्टी छोड़ता है जब वह किसी विचारधारा से जुड़ा हो। जब कोई खुद को बेचने के लिए बाज़ार में खड़ा हो और कोई उसे खरीद ले, तो इसे सौदेबाजी कहते हैं, बंटवारा नहीं। हमारे छह लोग दो दिन पहले बाजार में खड़े थे, उन्होंने खुद पर कीमत का टैग लगाया और बिक गए। वे किसी महान क्रांतिकारी सोच की वजह से पार्टी छोड़कर नहीं गए हैं।"

उन्होंने बागी सांसदों संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमप्रकाश राजेनिंबालकर पर कड़ा निशाना साधा, जिन्होंने पार्टी के सख्त 'थ्री-लाइन व्हिप' के बावजूद दिल्ली में हुई एक अहम संसदीय बैठक में हिस्सा नहीं लिया था।

यह बताते हुए कि छह सांसद अभी तक मुंबई क्यों नहीं लौटे हैं, राउत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार में मंत्री पद किसे मिलेगा, इसे लेकर अंदरूनी कलह शुरू हो गई थी।

राउत के मुताबिक, इस अफरातफरी को सुलझाने के लिए आधी रात को एक समझौता हुआ। उन्होंने दावा किया कि बाकी पांच नाराज सांसदों को शांत करने के लिए, अगले एक साल में हर एक को 25 करोड़ रुपए अतिरिक्त देने का वादा किया गया है, बशर्ते वे सार्वजनिक रूप से कोई हंगामा न करें। राउत ने आरोप लगाया, "वे अभी भारी पुलिस सुरक्षा के बीच कहीं छिपे हुए हैं।"

"अगर आपने कोई अपराध या पाप नहीं किया है, तो आपको पुलिस के इतने बड़े दस्ते की क्या जरूरत है? क्या महाराष्ट्र का गृह विभाग सिर्फ गद्दारों की सुरक्षा के लिए है, जबकि महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं?"

राउत ने भाजपा के एक वरिष्ठ नेता पर तंज कसा और कहा कि उन्होंने दावा किया था कि सांसद इसलिए पार्टी छोड़कर गए क्योंकि उद्धव ठाकरे कांग्रेस के साथ जुड़ गए थे। यह भाजपा के नेता 'तमाशा' में 'मावशी' (सहायक पात्र) की तरह व्यवहार करते हैं। जब ये छह सांसद चुनाव जीते थे, तो उन्हें महा विकास अघाड़ी (एमवीए) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मदद मिली थी। क्या आपको पता नहीं था कि उस समय कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा थी। कांग्रेस के प्रति अचानक यह नफरत क्यों?"

राउत ने सवाल किया और भाजपा की राष्ट्रवादी साख को चुनौती देते हुए पूछा कि क्या उनके किसी नेता ने भारत की आजादी के लिए अपनी जान दी थी।

संजय राउत ने आगे धमकी दी कि अगर ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों को सिर्फ आधे घंटे के लिए रोक दिया जाए, तो महाराष्ट्र में भाजपा सात टुकड़ों में बंट जाएगी, और गिरीश महाजन सबसे पहले पार्टी छोड़ेंगे।

शिव सेना स्थापना दिवस के लिए ठाकरे और शिंदे, दोनों गुटों द्वारा अलग-अलग बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस बीच, ठाकरे गुट ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है और अनुपस्थित छह सांसदों को उनकी संसदीय सदस्यता रद्द करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

संजय राउत ने कहा कि अगर आपमें जरा भी शर्म बची है, तो अपने सांसद पद से इस्तीफा दे दें। आप हमारी पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीते क्योंकि उद्धव ठाकरे और आम पार्टी कार्यकर्ताओं ने आपके लिए अपना पसीना और खून बहाया था। आपने अपने माता-पिता, साईं बाबा और देवी भवानी के नाम पर झूठी कसमें खाई थीं। अब थोड़ी हिम्मत दिखाएं, इस्तीफा दें और जनता का खुलकर सामना करें।

--आईएएनएस

डीकेएम/पीएम

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