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बहुध्रुवीयता और नए प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा देने पर चीन और रूस का संयुक्त वक्तव्य


बीजिंग, 21 मई (आईएएनएस)। चीन और रूस ने 20 मई को बहुध्रवीयता और नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा देने पर संयुक्त वक्तव्य जारी किया ।

बीजिंग, 21 मई (आईएएनएस)। चीन और रूस ने 20 मई को बहुध्रवीयता और नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा देने पर संयुक्त वक्तव्य जारी किया ।

इसमें कहा गया कि चीन और रूस दोनों का समृद्ध इतिहास और सभ्यताएं हैं। दोनों संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य और सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और बहुध्रुवीय विश्व में महत्वपूर्ण शक्तियां हैं, जो वैश्विक शक्ति संतुलन बनाए रखने और अंतर्राष्ट्रीय सम्बंधों की व्यवस्था में सुधार लाने में रचनात्मक भूमिका निभा रही हैं।

वक्तव्य में कहा गया कि द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से, अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य और शक्ति संतुलन में तीव्र परिवर्तन हुए हैं। एक ओर, उपनिवेशवाद की समाप्ति और शीत युद्ध की समाप्ति के कारण वैश्विक स्तर पर संप्रभु राज्यों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अधिक विविध और जटिल हो गया है। एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों के विकास स्तर और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। क्षेत्रीय और अंतर-क्षेत्रीय संगठनों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक सहयोग के सभी क्षेत्रों को कवर करते हैं, और वैश्विक मामलों में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। वैश्विक संपर्क और परस्पर निर्भरता मानव इतिहास में अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। कुछ देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मामलों में हेरफेर करने, औपनिवेशिक काल की सोच के साथ विश्व पर अपने हितों को थोपने और अन्य संप्रभु राज्यों के विकास को प्रतिबंधित करने के प्रयास पूरी तरह विफल रहे हैं।

इस पृष्ठभूमि में दोनों पक्ष अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय विश्व की वकालत करने और एक नए प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय सम्बंधों का निर्माण करने के लिए निम्नलिखित मुख्य सिद्धांतों का पालन करने का आह्वान करते हैं, जिसमें एक अधिक न्यायसंगत और तर्कसंगत वैश्विक शासन प्रणाली शामिल है:

खुलापन, समावेशिता और पारस्परिक लाभकारी सहयोग को बनाए रखना।

सुरक्षा समानता और अविभाज्यता को बनाए रखना।

अंतर्राष्ट्रीय सम्बंधों के लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा देना और वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार करना।

विश्व सभ्यताओं और मूल्यों की विविधता को बनाए रखना।

दोनों पक्ष बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण और अधिक न्यायपूर्ण नए प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय सम्बंधों के लिए एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना जारी रखेंगे।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/

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