
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 'रायसीना डायलॉग' के 11वें संस्करण में बदलती वैश्विक व्यवस्था पर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह समय बीत चुका है जब कोई एक देश हर क्षेत्र में हावी रह सकता था। जयशंकर के अनुसार, भविष्य 'बहुध्रुवीय' (Multipolar) होगा, जहाँ संतुलन और आपसी योगदान ही नई वैश्विक शक्ति के रूप में उभरेंगे।
इंटरैक्टिव सत्र के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि अब दुनिया में कोई भी राष्ट्र इतना शक्तिशाली नहीं है कि वह हर क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बनाए रखे। उन्होंने जोर देकर कहा कि बड़े देशों के बीच होने वाले 'संपूर्ण सौदों' (Grand Bargains) का दौर अब खत्म हो चुका है। अब छोटे और क्षेत्रीय देशों की ताकत भी मायने रखेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुध्रुवीयता और बहुपक्षीयता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि साथ-साथ चल सकते हैं।
एस. जयशंकर ने पिछले तीन वर्षों में भारत द्वारा आयोजित ‘वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ’ शिखर सम्मेलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब विकासशील देशों के लिए नए प्लेटफॉर्म तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बड़े देशों द्वारा केवल अपनी शक्ति के बल पर प्रभाव जमाना अब संभव नहीं होगा; दुनिया अब अधिक संतुलित होने की ओर अग्रसर है।
सम्मेलन के इतर विदेश मंत्री ने भारत की 'पड़ोस पहले' (Neighborhood First) और 'विज़न सागर' नीति को मजबूती देते हुए कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की:
भूटान: विदेश मंत्री ल्योनपो डी.एन. धुंग्येल के साथ बैठक में जयशंकर ने विशेष साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
श्रीलंका: विजिता हेराथ के साथ द्विपक्षीय रिश्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों पर चर्चा हुई।
अन्य मुलाकातें: उन्होंने सेशेल्स, रवांडा और केन्या के विदेश मंत्रियों के साथ भी आर्थिक और डिजिटल सहयोग बढ़ाने पर संवाद किया।
"संतुलन ही नई शक्ति बनेगी। अब कोई ऐसा 'बड़ा सौदा' नहीं होगा जिसे बाकी दुनिया को मजबूरी में मानना पड़े।" - एस. जयशंकर, विदेश मंत्री
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