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बलूचिस्तान: कस्टम्स वेयरहाउस में लगी आग से एलपीजी टैंकर में विस्फोट, 35 लोग झुलसे


क्वेटा। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मस्तुंग इलाके में रविवार को एक कस्टम्स वेयरहाउस में आग लगने के बाद एलपीजी टैंकर में विस्फोट हो गया। स्थानीय मीडिया ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया क‍ि हादसे में कम से कम 35 लोग झुलस गए।

'डॉन' अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को क्वेटा-कराची हाईवे पर स्थित लकपास इलाके के कस्टम्स परिसर में आग लगी। आग तेजी से फैलकर पार्किंग एरिया तक पहुंच गई। वहां कई गाड़ियां इसकी चपेट में आ गईं। देखते ही देखते आग एलपीजी टैंकर तक पहुंच गई, जिससे जोरदार धमाका हुआ।

एक अधिकारी ने बताया क‍ि एलपीजी से भरा एक टैंकर आग की लपटों में आ गया और पार्किंग एरिया में विस्फोट हो गया, जिससे भारी तबाही हुई। इस आग में अरबों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया। घायलों में से चार लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

आग उस गोदाम में लगी थी, जहां कस्टम अधिकारी जब्त किया गया सामान रखते थे, जिसमें कीमती और तस्करी का माल भी शामिल था। देखते ही देखते आग ने कई ट्रकों, दूसरी गाड़ियों और पास में खड़े एलपीजी टैंकर को भी अपनी चपेट में ले लिया। टैंकर में धमाके के बाद हालात और बिगड़ गए। मस्तुंग के डिप्टी कमिश्नर और दूसरे अधिकारी धमाके की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए।

घटना की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं और घायलों को क्वेटा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, आग इतनी भयानक थी कि उसे बुझाने में काफी मुश्किलें आईं। करीब दस फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग पर काबू पाने की कोशिश में लगी रहीं। तेज हवाओं, आसपास खड़े दूसरे ज्वलनशील टैंकरों और संकरे रास्तों की वजह से राहत कार्य प्रभावित हुआ। अभी तक आग लगने की असली वजह पता नहीं चल पाई है।

इससे पहले फरवरी में आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की ज्यादातर इमारतों के पास फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं हैं।

कराची के गुल प्लाजा मॉल में हुई भीषण आग की घटना, जिसमें 79 लोगों की मौत हो गई थी, उसके बाद कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी (सीडीए) ने इस्लामाबाद की इमारतों में फायर सेफ्टी और सुरक्षा इंतजामों का सर्वे कराया था।

डॉन के मुताबिक, इस सर्वे में 6,500 इमारतों की जांच की गई। सर्वे में पाया गया कि ज्यादातर इमारतों ने फायर सेफ्टी प्लान की मंजूरी नहीं ली थी और उन्हें फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट भी जारी नहीं किए गए थे। इस दौरान 300 सरकारी इमारतों का भी निरीक्षण किया गया।

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