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बलूचिस्तान में दिखावटी प्रेस कॉन्फ्रेंस और महिलाओं के कथित उत्पीड़न पर बीवाईसी ने जताई आपत्ति


क्वेटा, 25 मई (आईएएनएस)। मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने हाल के वर्षों में बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से की जा रही प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक परेशान करने वाले पैटर्न की कड़ी निंदा की है।

क्वेटा, 25 मई (आईएएनएस)। मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने हाल के वर्षों में बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से की जा रही प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक परेशान करने वाले पैटर्न की कड़ी निंदा की है।

मानवाधिकार संगठन का आरोप है कि हिरासत में लिए गए लोगों, खासकर महिलाओं को ऐसे दिखाया जाता है, जैसे उन्होंने अपराध कबूल कर लिया हो। संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसे तरीके घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के गंभीर उल्लंघन को लेकर चिंता पैदा करते हैं।

अपनी थीमैटिक रिपोर्ट 'बलूचिस्तान में दिखावटी प्रेस कॉन्फ्रेंस और कबूलनामे की कहानियां: बलूच महिलाओं और बीवाईसी के शांतिपूर्ण संघर्ष को आतंकवाद और उग्रवाद से जोड़कर राज्य हिंसा को जायज ठहराना' में, संगठन ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ किया गया व्यवहार 'मानवता को नकारना और बलूच महिलाओं को निशाना बनाना' है।

बीवाईसी का आरोप है कि पाकिस्तानी राज्य संस्थाएं जबरन गुमशुदगी, बिना प्रक्रिया के हिरासत, हिरासत में यातना और बलूच महिलाओं के मीडिया ट्रायल को सामान्य बनाने की कोशिश कर रही हैं, ताकि अपने आधिकारिक नैरेटिव और प्रचार को मजबूत किया जा सके।

संगठन ने कहा, “ऐसे मामलों में महिलाओं को अतिरिक्त सामाजिक बदनामी और परिवार पर बड़े असर का सामना करना पड़ता है। हिरासत की स्थितियां भी महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े विशेष पहलुओं पर चिंता पैदा करती हैं। अधिकारियों की ओर से बलूच महिलाओं की गरिमा और सम्मान का उल्लंघन किया जाता है, जब उन्हें कैमरों के सामने पेश किया जाता है, जबकि वे आमतौर पर मीडिया में अपना चेहरा नहीं दिखातीं। यह महिलाओं का गहरा अपमान है और बलूच सम्मान व गरिमा को निशाना बनाने जैसा है।”

रिपोर्ट के अनुसार, दर्ज मामलों में एक ऐसा पैटर्न दिखता है, जिसमें लोगों को बिना पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया जाता है, उन्हें बिना किसी संपर्क के रखा जाता है और बाद में सार्वजनिक मंचों पर लाकर “कबूलनामे” दिखाए जाते हैं।

इन तरीकों को लेकर संगठन ने कहा कि इससे निष्पक्ष सुनवाई, निर्दोष माने जाने का अधिकार और ऐसे बयानों की कानूनी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं। साथ ही, ऐसी दिखावटी प्रेस कॉन्फ्रेंस का इस्तेमाल राजनीतिक नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के लोगों को बदनाम करने और निशाना बनाने के लिए किया जाता है।

बीवाईसी के अनुसार, ये पैटर्न यह दिखाते हैं कि लोगों में डर फैलाने, गलत जानकारी देने और बलूच महिलाओं के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्रचार करने की कोशिश की जा रही है, ताकि शांतिपूर्ण विरोध को रोका जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बीवाईसी के और अन्य कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि बलूचिस्तान में असहमति और राजनीतिक अभिव्यक्ति की जगह लगातार कम हो रही है।

बीवाईसी ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निकायों और विशेष तंत्रों से अपील की है कि वे पाकिस्तान के इन कथित दमनकारी तरीकों के खिलाफ आवाज उठाएं। साथ ही, उन्होंने एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी आग्रह किया है कि वे बलूचिस्तान में महिलाओं को निशाना बनाए जाने की ओर वैश्विक ध्यान दिलाएं, और आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी अधिकारी 'जबरदस्ती, मीडिया ट्रायल, जबरन कबूलनामे और दिखावटी प्रेस कॉन्फ्रेंस' के जरिए सच्चाई को छिपा और तोड़-मरोड़ रहे हैं।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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