
उमरिया जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मानसून के चलते तीन महीने से बंद सफारी एक बार फिर गुलजार होने जा रही है। 1 अक्टूबर 2026 से कोर एरिया का पर्यटन सत्र औपचारिक रूप से शुरू होगा। इस बार पार्क प्रबंधन ने पर्यावरण और पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए कड़े कदम उठाए हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व सफारी नियम के तहत अब रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्रों में पुरानी BS-2 और BS-3 श्रेणी की जिप्सियों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
नए निर्देशों के अनुसार, अब केवल BS-4 और BS-6 उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों को ही सफारी के लिए प्रवेश दिया जाएगा। हालांकि यह नियम 7 वर्ष पूर्व ही जारी किया गया था, लेकिन अब पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) के सख्त निर्देशों के बाद पार्क प्रबंधन इसे कड़ाई से लागू कराने जा रहा है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वर्तमान में कुल 252 जिप्सियां पंजीकृत हैं, जिनमें से करीब 46 वाहन BS-2 श्रेणी के हैं। वर्ष 2012 तक निर्मित जिन जिप्सियों के पंजीयन की 15 वर्ष की अवधि पूरी हो चुकी है, उन्हें संचालन प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर किया जा रहा है।
पार्क प्रबंधन ने सभी जिप्सी संचालकों को जरूरी दस्तावेज जमा करने के आदेश दिए हैं। वाहनों की फिटनेस, प्रदूषण प्रमाण पत्र, पंजीयन और बीमा से जुड़े सभी कागजातों की सघन जांच शुरू कर दी गई है। अनुपयुक्त पाए जाने वाले वाहनों को सफारी रूट पर जाने की बिल्कुल अनुमति नहीं मिलेगी।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक (फील्ड डायरेक्टर) अनुपम सहाय ने बताया कि यह निर्णय वाहनों की तकनीकी सुरक्षा और तय पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखकर लिया गया है। पार्क के ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम रास्तों पर पुराने वाहनों के अचानक खराब होने से पर्यटकों की सुरक्षा पर खतरा मंडराता था।
नए और आधुनिक वाहनों के आने से जंगल में ध्वनि और वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके साथ ही पर्यटकों को सुरक्षित और आरामदायक भ्रमण का अनुभव मिलेगा। नए पर्यटन सत्र में देश-विदेश से भारी संख्या में सैलानियों के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए गाइडों को भी विशेष प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है।
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