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बंगाल: बर्दवान में लाखों रुपए की धोखाधड़ी के आरोप में चार साइबर जालसाज गिरफ्तार


कोलकाता, 27 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले में साइबर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने साइबर धोखाधड़ी के जरिए लोगों से लाखों रुपए हड़पने के आरोप में चार जालसाजों को गिरफ्तार किया।

कोलकाता, 27 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले में साइबर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने साइबर धोखाधड़ी के जरिए लोगों से लाखों रुपए हड़पने के आरोप में चार जालसाजों को गिरफ्तार किया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। ये गिरफ्तारियां बुधवार को खास जानकारी मिलने के बाद की गईं।

पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तार लोगों से पूछताछ करके कई अहम जानकारियां हासिल की हैं। जांच अधिकारियों को 28 संदिग्ध बैंक खाते मिले हैं। जांच से पता चला है कि इनमें साइबर धोखाधड़ी के जरिए करीब 7 लाख रुपए जमा किए गए थे।

हालांकि, जांच अधिकारी गिरफ्तार चारों लोगों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि संदिग्ध खाते किसके नाम पर खोले गए थे, पैसे किसने लिए और पैसे को कहां खपाया गया। जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बड़े घोटाले में और कौन-कौन शामिल है।

गिरफ्तार किए गए चार लोगों की पहचान बिजोय देबनाथ, शिवम बिस्वास, तरुणजीत देबनाथ और शुभो बाला के तौर पर हुई है। गिरफ्तार आरोपी पूर्वी बर्दवान जिले के नादानघाट पुलिस स्टेशन इलाके के चंपाहाटी और हाटशिमाला इलाकों में रहते हैं।

पुलिस के मुताबिक, राज्य के साइबर अपराध अधिकारियों ने बर्दवान साइबर पुलिस स्टेशन को एक रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें जांचकर्ताओं को कई जानकारियां दी गई थीं। बताया जा रहा है कि नादानघाट पुलिस स्टेशन के समुद्रगढ़ में नसरातपुर स्थित एक सरकारी बैंक की रेल बाजार शाखा के कुछ खातों में संदिग्ध लेनदेन किए गए हैं।

साइबर धोखाधड़ी के करीब 6,70,000 रुपए 28 बैंक खातों में जमा हुए हैं। इस दौरान यह भी पता चला है कि ये खाते 60 से ज्‍यादा साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े हैं। राज्य साइबर अपराध विभाग से इस बारे में जानकारी मिलने के बाद बर्दवान साइबर पुलिस स्टेशन ने जांच शुरू की।

अधिकारियों ने खुद संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करके जांच शुरू की। जांच में छह पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) एजेंटों के नाम सामने आए। अधिकारियों को 268 संदिग्ध मोबाइल नंबर भी मिले। ये एजेंट नकली दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड देते थे।

इन सिम कार्डों का इस्तेमाल कॉल, एसएमएस, निवेश धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जाता था।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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