ढाका, 28 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा चिंता का सबब बनी हुई है। ढाका स्थित एक महिला अधिकार संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, देश में रेप, गैंग रेप, दुष्कर्म के प्रयास, हत्या, आत्महत्या, यौन उत्पीड़न, दहेज से जुड़ी हिंसा और बाल विवाह जैसी घटनाएं बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गई हैं।
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ढाका, 28 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा चिंता का सबब बनी हुई है। ढाका स्थित एक महिला अधिकार संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, देश में रेप, गैंग रेप, दुष्कर्म के प्रयास, हत्या, आत्महत्या, यौन उत्पीड़न, दहेज से जुड़ी हिंसा और बाल विवाह जैसी घटनाएं बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गई हैं।
बांग्लादेश महिला परिषद (बीएमपी) ने ढाका के जातीय प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में कहा गया कि बांग्लादेश में हर उम्र की महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हिंसा का एक गंभीर पैटर्न सामने आ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, यौन हिंसा का सबसे अधिक खतरा बच्चियों को झेलना पड़ रहा है। बच्चियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म के 142, आत्महत्या के 203 और दुष्कर्म के प्रयास के 117 मामले दर्ज किए गए।
वयस्क महिलाओं में हत्या के सबसे अधिक मामले सामने आए, जिनकी संख्या 756 रही। इसके अलावा 376 दुष्कर्म पीड़िताओं और 125 यौन उत्पीड़न के मामलों का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया।
उम्र के आधार पर किए गए विश्लेषण में पाया गया कि बचपन में बच्चियां यौन हिंसा के अधिक जोखिम में रहती हैं, जबकि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के खिलाफ हत्या और आत्महत्या का खतरा बढ़ता जाता है।
रिपोर्ट में पेशे के आधार पर भी स्थिति का विश्लेषण किया गया। इसके अनुसार, गृहिणियां सबसे अधिक प्रभावित समूहों में शामिल रहीं। हत्या के पीड़ितों में गृहिणियों की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत, आत्महत्या के मामलों में 63 प्रतिशत और दहेज से जुड़ी हिंसा के मामलों में 94 प्रतिशत रही।
वहीं, छात्राओं से जुड़े आंकड़े भी चिंताजनक रहे। दुष्कर्म के प्रयास के मामलों में छात्राओं की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत, आत्महत्या के मामलों में 67 प्रतिशत, सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में 39 प्रतिशत रही।
बांग्लादेश में न तो घर और न ही शैक्षणिक संस्थान महिलाओं और बच्चियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित स्थान बन पाए हैं, ऐसा रिपोर्ट दावा करती है। संगठन ने इसके लिए दोषियों को सजा से बच निकलने, प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप, जांच में देरी, कमजोर गवाही और सबूतों तथा पीड़ितों को ही दोष देने जैसी सामाजिक प्रवृत्तियों को जिम्मेदार बताया।
बीएमपी ने महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए मौजूदा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, त्वरित न्याय, जवाबदेही मजबूत करने और जनजागरूकता बढ़ाने की मांग की।
बीएमपी की अध्यक्ष फौजिया मुस्लिम ने कहा कि हिंसा का शिकार बनने के लिए महिलाओं की कोई निश्चित उम्र नहीं है। उन्होंने कहा कि छह साल की बच्ची से लेकर 60 वर्ष से अधिक उम्र की गृहिणी तक, महिलाएं जीवन के हर चरण में जोखिम का सामना कर रही हैं।
उन्होंने छह से नौ वर्ष की उम्र की बच्चियों के बीच दुष्कर्म के मामलों की अधिक संख्या को समाज के लिए बेहद चिंताजनक बताया। साथ ही उन्होंने दुष्कर्म के साथ-साथ महिलाओं की हत्याओं में बढ़ोतरी पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि बांग्लादेश में महिलाएं यौन हिंसा के साथ अपने जीवन पर बढ़ते खतरे का भी सामना कर रही हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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