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'बंटवारा 1947' के नए कैरेक्टर पोस्टर रिलीज, विभाजन की दर्दनाक कहानी की झलक ने बढ़ाई उत्सुकता


मुंबई, 17 जून (आईएएनएस)। बॉलीवुड की बहुचर्चित फिल्म 'बंटवारा 1947' को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है। इस बीच फिल्म के मेकर्स ने एक और बड़ा अपडेट साझा किया है। दरअसल, मोशन पोस्टर के बाद अब फिल्म के मुख्य किरदारों के कैरेक्टर पोस्टर जारी किए गए हैं।

मुंबई, 17 जून (आईएएनएस)। बॉलीवुड की बहुचर्चित फिल्म 'बंटवारा 1947' को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है। इस बीच फिल्म के मेकर्स ने एक और बड़ा अपडेट साझा किया है। दरअसल, मोशन पोस्टर के बाद अब फिल्म के मुख्य किरदारों के कैरेक्टर पोस्टर जारी किए गए हैं।

आमिर खान प्रोडक्शन ने इन नए पोस्टर्स को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया, जिसमें फिल्म के प्रमुख कलाकारों, जैसे दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी, सुपरस्टार सनी देओल, अभिनेत्री प्रीति जिंटा, करण देओल, अली फजल और अभिमन्यु सिंह के किरदारों की झलक दिखाई गई। हर किरदार को उस दौर की पृष्ठभूमि में दिखाया गया है। इन पोस्टर्स में सभी कलाकार एक ऐसे समय में नजर आ रहे हैं, जब देश विभाजन के दर्द और हिंसा से गुजर रहा था।

पोस्टर्स में सबसे खास बात यह है कि सभी किरदारों के चेहरों पर विभाजन के समय के दर्द और संघर्ष को दिखाने की कोशिश की गई है।

मेकर्स ने इंस्टाग्राम पर कैरेक्टर पोस्टर्स को साझा करते हुए कैप्शन में लिखा, ''एक ऐसी दुनिया में जहां सब कुछ टूट रहा था, वहां कुछ लोगों की कहानी साहस और हिम्मत की मिसाल बन गई। 'बंटवारा 1947' उन लोगों की कहानी है, जिन्होंने उस कठिन समय को जिया और उससे उबरने की कोशिश की।''

इससे पहले फिल्म का पहला मोशन पोस्टर भी जारी किया गया था, जिसमें सनी देओल, प्रीति जिंटा और शबाना आजमी मुख्य रूप से नजर आए थे। उस पोस्टर में आग, हिंसा और अफरा-तफरी का माहौल दिखाया गया था।

फिल्म 'बंटवारा 1947' का निर्देशन मशहूर फिल्मकार राजकुमार संतोषी कर रहे हैं और इसका निर्माण आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले हो रहा है। यह फिल्म सनी देओल और राजकुमार संतोषी का री-यूनियन है। इससे पहले दोनों ने 'घायल' और 'दामिनी' जैसी यादगार फिल्मों में साथ काम किया था।

फिल्म की कहानी 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है। यह उन आम लोगों की जिंदगी को दिखाती है जो इस विभाजन से प्रभावित हुए थे। कहानी में एक हिंदू परिवार को दिखाया गया है जो लाहौर से भारत आता है और उन्हें एक हवेली मिलती है जो पहले एक मुस्लिम परिवार की थी। लेकिन कहानी में मोड़ तब आता है, जब उन्हें पता चलता है कि उस हवेली में एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला अभी भी रह रही है। इसी स्थिति से इंसानी रिश्तों, भावनाओं और संघर्ष की एक गहरी कहानी पेश की जाएगी।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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