बर्न, 22 जून (आईएएनएस)। ईरान के शीर्ष वार्ताकार 18 घंटे तक चली गहन वार्ता के बाद स्विट्जरलैंड से तेहरान के लिए रवाना हो गए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने दावा किया है कि वार्ता में रचनात्मक प्रगति हुई और "प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता" सिद्धांत पर दोनों देशों ने आगे बढ़ने का फैसला लिया है। लेबनान में संघर्ष विराम भी इसका अहम हिस्सा है।
बर्न, 22 जून (आईएएनएस)। ईरान के शीर्ष वार्ताकार 18 घंटे तक चली गहन वार्ता के बाद स्विट्जरलैंड से तेहरान के लिए रवाना हो गए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने दावा किया है कि वार्ता में रचनात्मक प्रगति हुई और "प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता" सिद्धांत पर दोनों देशों ने आगे बढ़ने का फैसला लिया है। लेबनान में संघर्ष विराम भी इसका अहम हिस्सा है।
बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने संघर्ष समाप्ति से संबंधित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर गहन वार्ता पूरी करने के बाद स्वदेश लौटने की तैयारी कर ली है।
जारी बयान के मुताबिक, समझौते के क्रियान्वयन से जुड़ी यह वार्ता रविवार, 22 जून को स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न झील क्षेत्र में शुरू हुई और सोमवार तड़के तक जारी रही।
इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर और पाकिस्तान द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, ईरान और अमेरिका के परामर्श से समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए कार्यकारी तंत्र पर सहमति बनी है। साथ ही यह भी तय किया गया कि समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विशेषज्ञ और तकनीकी स्तर की वार्ताएं आगे भी जारी रहेंगी।
ईरानी पक्ष के अनुसार, इस दौर की वार्ता में विशेष रूप से तीन मुद्दों पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। पहला लेबनान में युद्ध और सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए एक संघर्ष-नियंत्रण तंत्र स्थापित करने, दूसरा ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात से संबंधित प्रावधानों को आगे बढ़ाने और तीसरा ईरान की जमी हुई विदेशी परिसंपत्तियों को मुक्त कराने की प्रक्रिया पर प्रगति हुई है।
ईरान ने कहा कि इन समझौतों से दोनों पक्षों की पारस्परिक प्रतिबद्धताओं को लागू करने का रास्ता आसान होगा।
बयान में कहा गया कि पूरी प्रक्रिया का आधार "प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता" का सिद्धांत है। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह दूसरे पक्ष की ओर से किए जाने वाले वादों और दायित्वों के क्रियान्वयन पर नजर रखेगा और यह सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग करेगा कि उन प्रतिबद्धताओं का पालन किया जाए।
--आईएएनएस
केआर/
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